गुवाहाटी: 'डिजिटल अरेस्ट' कर सीनियर सिटिजन से ठगे ₹2.13 करोड़, ED ने 43 खाते किए फ्रीज़
गुवाहाटी के एक वरिष्ठ नागरिक को 'डिजिटल अरेस्ट' कर की गई करोड़ों की ऑनलाइन ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस साइबर फ्रॉड से जुड़े 43 बैंक खातों में जमा…
गुवाहाटी के एक वरिष्ठ नागरिक को 'डिजिटल अरेस्ट' कर की गई करोड़ों की ऑनलाइन ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस साइबर फ्रॉड से जुड़े 43 बैंक खातों में जमा 2.12 करोड़ रुपये की रकम को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
यह पूरा मामला असम पुलिस की CID और गुवाहाटी पुलिस द्वारा अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ दर्ज FIR पर आधारित है। ईडी ने इसी आधार पर अपनी जांच शुरू की थी।
ऐसे बनाया गया ठगी का शिकार
जांच में सामने आया कि सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच, खुद को TRAI, मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI का अधिकारी बताकर साइबर ठगों ने पीड़ित सीनियर सिटिजन से संपर्क साधा। उन्होंने पीड़ित को यकीन दिलाया कि उनके आधार कार्ड से जुड़ा एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद उन्हें वॉट्सऐप वीडियो कॉल के ज़रिए 'डिजिटल अरेस्ट' में डाल दिया गया।
पीड़ित को डराने के लिए एक फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट वॉरंट' दिखाया गया और बनावटी अदालती कार्यवाही भी की गई। उन्हें हर दो घंटे में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने को मजबूर किया गया। साथ ही, यह धमकी भी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उन्हें 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' के तहत हिरासत में ले लिया जाएगा।
कैसे गंवाए 2.13 करोड़ रुपये?
साइबर जालसाजों ने पीड़ित से पहले परिवार के फंड की 'RBI जांच' और फिर एक नकली 'बेल बॉन्ड' के बहाने पैसे मांगे। इन झांसों में आकर पीड़ित ने 19 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 2.13 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस रकम को चुकाने के लिए उन्हें अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और शेयर बेचने पड़े, साथ ही अपने पेंशन खाते और बीमा पॉलिसी पर कर्ज भी लेना पड़ा।
देशभर में फैला था खातों का नेटवर्क
ईडी की जांच से पता चला कि ठगी गई रकम को तुरंत ही देशभर में फैले व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों के कई बैंक खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया। पैसे के स्रोत को छिपाने के लिए इस रकम को या तो कैश में निकाला गया, या फिर डिजिटल करेंसी में बदला गया और पेमेंट गेटवे के माध्यम से आगे भेज दिया गया।
एजेंसी ने पाया कि इन खातों से हुए लेन-देन खाताधारकों की प्रोफाइल से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे, जो एक संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की ओर इशारा करता है। मनी ट्रेल का पता लगाकर ईडी ने 43 ऐसे बैंक खातों की पहचान की, जिनमें अपराध की कमाई अब भी मौजूद थी, जिन्हें अब ज़ब्त कर लिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



