मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात में POCSO मामलों पर बड़ा एक्शन: 5 साल में 900 से ज़्यादा को उम्रकैद, 16 को फांसी

गुजरात में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर लगाम कसने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की कोशिशें रंग ला रही हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य की विशेष अदालतों ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत 1,785…

गुजरात में POCSO मामलों पर बड़ा एक्शन: 5 साल में 900 से ज़्यादा को उम्रकैद, 16 को फांसी
(फोटो: IANS)

गुजरात में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर लगाम कसने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की कोशिशें रंग ला रही हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य की विशेष अदालतों ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत 1,785 मामलों में फैसला सुनाया है। समाचार एजेंसी IANS से मिले आंकड़ों के अनुसार, इन फैसलों में 908 दोषियों को आजीवन कारावास और 16 को मौत की सज़ा दी गई है, जो बाल यौन शोषण के खिलाफ सरकार की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति को दर्शाता है।

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राज्य सरकार इन संवेदनशील मामलों में तेज़ी लाने के लिए जांच से लेकर सुनवाई तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने पर ज़ोर दे रही है। इसके तहत पुलिस जांच, चार्जशीट दाखिल करने की समय-सीमा और अदालत में प्रभावी अभियोजन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

मामलों के निपटारे में लगातार तेज़ी

आंकड़े बताते हैं कि पॉक्सो मामलों में फैसले सुनाने की रफ़्तार साल-दर-साल बढ़ी है। जहां 2022 में कुल 194 मामलों में फैसले आए और 107 को उम्रकैद हुई, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 499 फैसलों तक पहुंच गई, जिनमें 340 दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा मिली। यह सिलसिला 2026 में भी जारी है, जहां अगस्त तक ही 346 मामलों का निपटारा हो चुका है और 241 अपराधियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई जा चुकी है। अकेले अगस्त 2026 में 48 मामलों में सज़ा सुनाई गई, जिसमें 35 को आजीवन कारावास मिला।

प्रभावी अभियोजन और समय पर चार्जशीट

इस प्रक्रिया में सरकारी वकीलों की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। गांधीनगर के कानून एवं व्यवस्था डीआईजी मकरंद चौहान ने बताया, "पॉक्सो मामलों में प्रभावी अभियोजन सजा दिलाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।" उन्होंने कहा कि यदि कोई मामला बेहद गंभीर प्रकृति का होता है, तो राज्य पुलिस मुख्यालय को विशेष सरकारी अभियोजक (Special Public Prosecutor) की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है।

सूरत ज़िला एवं सत्र न्यायालय के सरकारी वकील नयन सुखड़वाला के अनुसार, "पॉक्सो मामलों में समय पर चार्जशीट दाखिल करना बेहद महत्वपूर्ण है।" उन्होंने बताया कि यदि निर्धारित समय में चार्जशीट दाखिल नहीं होती तो आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत मिल सकती है, जिससे केस कमज़ोर हो सकता है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों को देखें तो, 5,463 मामलों में 31 से 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई, जो जांच में तेज़ी को दिखाता है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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