रविवार, 25 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अंतरिक्ष में भारत की नई थर्मल आंख 'तापस-1' लॉन्च, आपदा प्रबंधन से खेती तक मिलेगी मदद

भारत के स्पेस-टेक सेक्टर में एक अहम मील का पत्थर स्थापित हुआ है। गुजरात के एक स्टार्टअप, सैटलियो लैब्स ने देश का पहला समर्पित कमर्शियल थर्मल पेलोड 'तापस-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। समाचार एजेंसी…

अंतरिक्ष में भारत की नई थर्मल आंख 'तापस-1' लॉन्च, आपदा प्रबंधन से खेती तक मिलेगी मदद
(फोटो: IANS)

भारत के स्पेस-टेक सेक्टर में एक अहम मील का पत्थर स्थापित हुआ है। गुजरात के एक स्टार्टअप, सैटलियो लैब्स ने देश का पहला समर्पित कमर्शियल थर्मल पेलोड 'तापस-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह लॉन्च 1 अक्टूबर 2026 को अमेरिका से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए किया गया। इस मिशन ने भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।

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तापस-1 (थर्मल एक्सेस प्लेटफॉर्म फॉर एनालिटिक्स एंड सॉल्यूशंस-1) को पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में एक सैटेलाइट के साथ स्थापित किया गया है। इसका मुख्य काम पृथ्वी की सतह के तापमान में होने वाले बदलावों की उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और डेटा इकट्ठा करना है। यह तकनीक ज़मीन से निकलने वाली गर्मी यानी तापीय उत्सर्जन का विश्लेषण करती है, जिससे दिन और रात, दोनों समय सटीक जानकारी मिल सकेगी।

तापस-1 कैसे काम करेगा और क्या हैं इसके फायदे?

करीब तीन किलोग्राम वजनी यह पेलोड एक सैटेलाइट पर लगाया गया है। यह पृथ्वी की सतह से लगातार निकलने वाले तापीय उत्सर्जन को मापेगा। सैटलियो लैब्स के सह-संस्थापक और CTO डॉ. आर घोष ने बताया, "थर्मल डेटा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके जरिए दिन और रात, दोनों समय अनुमान लगाया जा सकता है। यह तकनीक सूर्य के प्रकाश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पृथ्वी की सतह से निकलने वाले उत्सर्जन पर आधारित है।"

इस डेटा से कई अहम क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है:

  • शहरी प्रबंधन: शहरों में बढ़ते 'हीट आइलैंड' प्रभाव को समझने और गर्मी प्रबंधन में।
  • कृषि: ज़मीन की सेहत, सिंचाई की ज़रूरत और फसल की स्थिति पर नज़र रखने में।
  • आपदा प्रबंधन: जंगल की आग, बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं की निगरानी और चेतावनी में।
  • जल संसाधन: पानी की कमी वाले इलाकों की पहचान और निगरानी करने में।

गुजरात बन रहा स्पेस-टेक का नया केंद्र

सैटलियो लैब्स की यह उपलब्धि गुजरात के उभरते स्पेस-टेक इकोसिस्टम का एक बड़ा उदाहरण है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'गुजरात स्पेसटेक पॉलिसी 2025-30' जारी की है, जिसका लक्ष्य गुजरात को इस क्षेत्र में एक वैश्विक नवाचार और विनिर्माण केंद्र बनाना है। जानकारी के अनुसार, गुजरात ऐसी नीति लाने वाला देश का पहला राज्य है।

गांधीनगर स्थित गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन (GSEM) की मिशन डायरेक्टर नेहा कुमारी ने कहा कि राज्य में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क और साझा तकनीकी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया, "नीति, विनिर्माण सुविधाओं और तकनीकी सहयोग से राज्य में स्पेसटेक कंपनियों के लिए काम करने का वातावरण तैयार हुआ है।" सैटलियो लैब्स के सह-संस्थापक और CSO उर्मिल बखाई ने भी इस नीति से मिले प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।

विशेषज्ञों की राय

अहमदाबाद के प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. नरोत्तम साहू के अनुसार, डीप टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आपदा प्रबंधन, कृषि उत्पादन और संसाधनों की कमी जैसी कई बड़ी समस्याओं को अवसरों में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्नत इंफ्रारेड कैमरों और अंतरिक्ष आधारित निगरानी से समस्याओं की बेहतर पहचान और समाधान में मदद मिल सकती है। तापस-1 से मिलने वाले डेटा का वास्तविक प्रभाव उसके विश्लेषण और उपयोग पर निर्भर करेगा, लेकिन इसकी संभावनाएं काफी व्यापक हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social टेक डेस्क

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