एक अणु को 'घुमाकर' बिजली की धारा 100 गुना बढ़ी, IIT मद्रास समेत 5 देशों के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज
सोचिए, अगर एक अकेले अणु (molecule) को घुमाकर उससे बहने वाली बिजली की धारा को 100 गुना तक बढ़ाया जा सके तो क्या होगा? विज्ञान की दुनिया में यह अब एक हकीकत बन गया है, जिससे भविष्य में बेहद छोटे यानी…
सोचिए, अगर एक अकेले अणु (molecule) को घुमाकर उससे बहने वाली बिजली की धारा को 100 गुना तक बढ़ाया जा सके तो क्या होगा? विज्ञान की दुनिया में यह अब एक हकीकत बन गया है, जिससे भविष्य में बेहद छोटे यानी नैनो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने की राह खुल सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत, इज़रायल, जर्मनी, डेनमार्क और चीन के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने यह महत्वपूर्ण खोज की है, जिसमें IIT मद्रास के वैज्ञानिक भी शामिल हैं।
यह अहम शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित हुआ है। हालांकि, इसे रोजमर्रा की तकनीक में बदलने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत होगी, लेकिन यह शुरुआती खोज अपने आप में क्रांतिकारी है। इस प्रयोग से यह समझने में मदद मिली है कि परमाणु के स्तर पर बिजली और अणुओं की गति के बीच कैसा गहरा संबंध होता है।
कैसे काम करता है यह 'आणविक पेंच'?
इस प्रयोग के पीछे की प्रेरणा आर्किमिडीज के उस प्राचीन पेंच से ली गई थी, जिसका इस्तेमाल पानी को नीचे से ऊपर उठाने के लिए किया जाता है। वैज्ञानिकों ने यही सिद्धांत लागू करते हुए 'हेलिसीन' नाम के एक घुमावदार, पेंच जैसे अणु को चुना। इस अणु को सोने (gold) के दो बेहद महीन इलेक्ट्रोड के बीच रखा गया।
IIT मद्रास के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार सिंह और उनकी टीम ने पाया कि जब इन इलेक्ट्रोड के बीच बिजली प्रवाहित की गई, तो अणु एक निश्चित चक्र में घूमने लगा। घूमते समय यह अणु कुछ ऐसी स्थितियों में पहुंच जाता है, जहां से इलेक्ट्रॉनों का गुजरना बहुत आसान हो जाता है। इसी का नतीजा था कि अणु के आर-पार बहने वाली बिजली की धारा में लगभग 100 गुना की आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की गई।
दिशा पर भी पाया गया नियंत्रण
इस खोज की एक और खास बात यह थी कि वैज्ञानिक अणु के घूमने की दिशा को भी नियंत्रित करने में सफल रहे। जब उन्होंने बिजली की ध्रुवता (polarity) को बदला, तो अणु के घूमने की दिशा भी उलट गई। IANS के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जिन 122 मामलों में अणु की स्थिति में बदलाव को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सका, उन सभी में एक जैसा ही पैटर्न देखने को मिला।
इस सफलता से भविष्य में ऐसे स्विच और उपकरण विकसित करने की संभावना पैदा हुई है, जिनमें बिजली के बहाव को सिर्फ अणुओं की गति से नियंत्रित किया जा सकेगा। अब वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या विशेष प्रकाश या अलग तरह की विद्युत धाराओं से भी अणुओं की गति को नियंत्रित किया जा सकता है।
इनपुट: IANS



