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आखिर क्यों राजद्रोह कानून को ख़त्म नही करेगी केंद्र सरकार

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पिछले दिनों जिस कानून की सबसे अधिक चर्चा थी वो है ‘राजद्रोह कानून’. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में एक अहम घोषणा ये भी की थी कि इस कानून को ख़त्म किया जायेगा. हालाँकि कांग्रेस मात्र 52 सीटों पर सिमट गयी है और अब कांग्रेस अपने इस वादे को पूरा नही कर सकती है. 

लेकिन अब केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा कि राष्ट्र-विरोधी, पृथकतावादी, व आतंकवादी तत्वों से प्रभावकारी ढंग से निपटने के लिए इस कानून की ज़रूरत है. और ये भी बताया की मौजूदा सरकार की कोई भी योजना ऐसी नही है जिसमे इस कानून को खत्म किया जायेगा. 

ये जवाब राय ने टीआरएस के बंदा प्रकाश के लिखित सवाल के जवाब में दिया है. प्रकाश ने यह जानना चाहा कि क्या सरकार आजाद भारत के लोगों पर लागू औपनिवेशिक युग के कानून को ख़त्म करने पर विचार कर रही है? 

इस सवाल के जवाब में केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि “देशद्रोह के अपराधों से निपटने वाले भारतीय दंड संहिता के इस प्रावधान को रद करने का कोई प्रस्ताव नही है.”

क्या है राजद्रोह कानून

राजद्रोह कानून को IPC की धारा 124 A के तहत परिभाषित किया गया है. इसके अनुसार ”कोई जो भी बोले या लिखे गए शब्दों से, संकेतों से, दृश्य निरूपण से या दूसरों तरीकों से घृणा या अवमानना पैदा करता है या करने की कोशिश करता है या भारत में कानून सम्मत सरकार के प्रति वैमनस्य को उकसाता है या उकसाने की कोशिश करता है, तो वह सजा का भागी होगा.”

वैसे तो 2014 से 2016 तक इस धारा के अंतर्गत सिर्फ 2 लोगों के खिलाफ ही दोष को साबित किया जा सकता है. इसके पहले इस कानून को ब्रिटेन ने भी 2009 में ख़त्म कर दिया था, ऐसा माना जाता है कि भारत में इस कानून की नींव रखने वाले अंग्रेज़ ही थे.

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