गढ़चिरौली हिंसा: वकील सुरेंद्र गाडलिंग की ज़मानत अर्ज़ी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 अक्टूबर तक टली
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 2016 में हुई हिंसा और आगज़नी के मामले में गिरफ़्तार वकील सुरेंद्र गाडलिंग की ज़मानत याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 14 अक्टूबर को सुनवाई…
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 2016 में हुई हिंसा और आगज़नी के मामले में गिरफ़्तार वकील सुरेंद्र गाडलिंग की ज़मानत याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गाडलिंग पिछले सात साल और सात महीने से ज़्यादा समय से जेल में बंद हैं।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पहले ही ज़मानत मिल चुकी है। उन्होंने दलील दी कि जिस ट्रक को जलाने के लिए उकसाने का आरोप गाडलिंग पर है, उस घटना में शामिल दो मुख्य आरोपियों को ज़मानत दी जा चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
यह मामला दिसंबर 2016 का है, जब प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक हथियारबंद दस्ते ने एटापल्ली तहसील के सुरजागढ़ पहाड़ी इलाके में हमला किया था। माओवादियों ने इस क्षेत्र में हो रही व्यावसायिक खनन गतिविधियों का विरोध करते हुए लगभग 76 से 80 वाहनों और मशीनों को आग के हवाले कर दिया था, जिनमें ट्रक, टिपर और जेसीबी शामिल थे। सुरेंद्र गाडलिंग को इस मामले में जनवरी 2019 में गिरफ़्तार किया गया था। इससे पहले वह 2018 के एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में भी सह-आरोपी के तौर पर जेल में थे।
ट्रायल में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने कहा था कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से यह पता लगाएगी कि संबंधित एनआईए अदालत में न्यायाधीश की तैनाती है या नहीं, ताकि मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके।
इनपुट: IANS



