खनिज परिवहन में पारदर्शिता: GPS लगाने में तमिलनाडु का नेतृत्व कर रहा है कोयंबटूर
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में खनिज पदार्थों का परिवहन करने वाले सभी ट्रकों के लिए 31 अक्टूबर तक ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस नियम का पालन करने में कोयंबटूर जिला सबसे आगे…
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में खनिज पदार्थों का परिवहन करने वाले सभी ट्रकों के लिए 31 अक्टूबर तक ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस नियम का पालन करने में कोयंबटूर जिला सबसे आगे निकलकर सामने आया है, जहाँ निर्धारित समय-सीमा से पहले ही 60 प्रतिशत वाहनों में यह उपकरण लगाया जा चुका है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य खनिजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखना और अवैध परिवहन को रोकना है।
कोयंबटूर में लगभग 7,000 ट्रक खनिज परिवहन के काम में लगे हैं। इनमें से अब तक 4,200 वाहनों को GPS से लैस कर दिया गया है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि बजरी और लाल मिट्टी जैसे खनिज ले जाने वाले ट्रक मालिकों के साथ बैठकें की गई हैं और उन्हें प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी के अनुसार, "अब तक 4,200 वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगाए जा चुके हैं।"
अवैध परिवहन रोकने की कोशिश
कोयंबटूर की भौगोलिक स्थिति इस अभियान को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है क्योंकि इसकी सीमा केरल से लगती है, जो पड़ोसी राज्य में खनिजों के परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। कोयंबटूर-केरल सीमा पर कुल 13 चौकियां (चेक पोस्ट) हैं, जहाँ अधिकारी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए तैनात हैं। खनिज संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस मिलकर अनधिकृत परिवहन के खिलाफ संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई कर रहे हैं।
अन्य जिलों से बेहतर प्रदर्शन
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 31 अक्टूबर तक GPS नहीं लगवाने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक, कोयंबटूर की यह प्रगति उसे अन्य जिलों से काफी आगे रखती है। राज्य के कुछ अन्य जिलों में जहाँ 12,000 तक ट्रक खनिज परिवहन में लगे हैं, वहाँ भी अब तक केवल लगभग 2,000 वाहनों में ही GPS लग पाया है। प्रशासन शेष वाहनों में भी महीने के अंत तक इंस्टॉलेशन पूरा करने के लिए कदम उठा रहा है।
इनपुट: IANS



