शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कांगो में इबोला का कहर: संक्रमण दर 10 गुना ज़्यादा, मृतकों की संख्या 2500 के पार

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) अब तक के सबसे तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप का सामना कर रहा है, जहाँ संक्रमण की रफ्तार 2014-16 की महामारी से भी 10 गुना अधिक हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की…

कांगो में इबोला का कहर: संक्रमण दर 10 गुना ज़्यादा, मृतकों की संख्या 2500 के पार
(फोटो: IANS)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) अब तक के सबसे तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप का सामना कर रहा है, जहाँ संक्रमण की रफ्तार 2014-16 की महामारी से भी 10 गुना अधिक हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त तक देश में 5,290 पुष्ट मामलों के साथ 2,516 लोगों की मौत हो चुकी है, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे इतिहास का सबसे घातक इबोला संकट बनने की चेतावनी दी है।

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अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा प्रकोप के 13वें सप्ताह में दर्ज मामले और मौतें, पश्चिम अफ्रीका में 2014-16 के संकट की इसी अवधि की तुलना में क्रमशः 10 गुना और सात गुना अधिक हैं। उस भयावह महामारी में कुल 28,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे और 11,000 से ज्यादा जानें गई थीं।

नियंत्रण में बड़ी चुनौतियाँ

इस प्रकोप के पीछे 'बुंडीबुग्यो वायरस' है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। इसके लक्षण अन्य इबोला प्रकारों की तुलना में हल्के हो सकते हैं, जिस कारण लोग शुरुआती दौर में चिकित्सा सहायता लेने में देरी कर रहे हैं। कांगो के पूर्वी हिस्से में जारी सशस्त्र संघर्ष, बड़े पैमाने पर विस्थापन, लोगों की आवाजाही और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति अविश्वास ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

चिंता की बात यह है कि संक्रमण अब छह प्रांतों के 56 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है। हाल ही में बास-उएले प्रांत में भी दो नए मामले सामने आए हैं, जहाँ पहले यह वायरस नहीं पहुँचा था।

कमजोर निगरानी और सामुदायिक मौतें

प्रकोप पर काबू पाने के प्रयासों में सबसे बड़ी बाधा संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने की कमजोर प्रक्रिया है। फिलहाल, 10 प्रतिशत से भी कम नए मामले ऐसे लोगों में मिल रहे हैं जो पहले से निगरानी में थे, जबकि प्रकोप को नियंत्रित मानने के लिए यह आंकड़ा 90-95 प्रतिशत होना चाहिए।

इसके अलावा, ज्यादातर मौतें अस्पतालों के बाहर हो रही हैं। 17 अगस्त को दर्ज की गई 97 प्रतिशत मौतें समुदाय के स्तर पर हुईं, जो यह दर्शाता है कि संक्रमित लोगों तक समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं पहुँच पा रही है। अधिकारियों का यह भी मानना है कि वास्तविक संक्रमितों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि अभी केवल 30 से 40 प्रतिशत मामलों का ही पता चल पा रहा है।

इनपुट: IANS

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