शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अमरनाथ यात्रा का समापन चरण शुरू, श्रावण पूर्णिमा पर पवित्र गुफा पहुंचेगी 'छड़ी मुबारक'

वार्षिक अमरनाथ यात्रा अपने अंतिम और पारंपरिक चरण में प्रवेश कर चुकी है। शनिवार को पवित्र 'छड़ी मुबारक' (पवित्र गदा) अपने संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी के नेतृत्व में पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद पवित्र…

अमरनाथ यात्रा का समापन चरण शुरू, श्रावण पूर्णिमा पर पवित्र गुफा पहुंचेगी 'छड़ी मुबारक'
(फोटो: IANS)

वार्षिक अमरनाथ यात्रा अपने अंतिम और पारंपरिक चरण में प्रवेश कर चुकी है। शनिवार को पवित्र 'छड़ी मुबारक' (पवित्र गदा) अपने संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी के नेतृत्व में पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद पवित्र गुफा की ओर रवाना हो गई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी छड़ी मुबारक के गुफा मंदिर पहुंचने के साथ ही इस वर्ष की यात्रा का औपचारिक समापन होता है।

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इस धार्मिक यात्रा का नेतृत्व कर रहे महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा के दिन, यानी 28 अगस्त को, पवित्र गदा को गुफा में स्थापित किया जाएगा। वहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पारंपरिक पूजन होगा। यह वही स्थान है जहां माना जाता है कि भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरता की कथा सुनाई थी।

यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम

महंत दीपेंद्र गिरी ने यात्रा के पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "आज श्रावण शुक्ल पक्ष दशमी तिथि पर, पवित्र छड़ी मुबारक को लेकर मुख्य यात्रा के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। 22 और 23 अगस्त को पहलगाम में हम विश्राम करेंगे, 24 तारीख की रात को हम चंदनवाणी में रुकेंगे, और 25 अगस्त को हम शेषनाग में रुकेंगे।"

उन्होंने आगे बताया कि तिथियों में कुछ भिन्नता के कारण इस बार पंचतरणी में दो रातों का पड़ाव होगा। उन्होंने कहा, "यहां हम 26 और 27 की रात को रुकेंगे।" 28 अगस्त को गुफा में पूजन के बाद रात्रि विश्राम के लिए छड़ी मुबारक वापस पंचतरणी आएगी।

यात्रा का समापन और विसर्जन

पवित्र गुफा में दर्शन और पूजन के बाद वापसी की यात्रा 29 अगस्त को शुरू होगी। इस दिन शेषनाग और चंदनवाणी होते हुए पड़ाव पहलगाम में होगा। महंत गिरी के अनुसार, 30 अगस्त को लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद महात्माओं के लिए एक भोज का आयोजन होगा, जिसके साथ ही वार्षिक छड़ी मुबारक अमरनाथ यात्रा संपन्न हो जाएगी।

इस वर्ष की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा कि शुरुआती 10-12 दिनों में करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, लेकिन बाद में खराब मौसम के कारण यात्रा काफी हद तक बाधित रही। उन्होंने याद दिलाया कि 2012 में 39 दिनों की यात्रा में 6 लाख 35 हजार लोगों ने दर्शन किए थे, जो अब तक का एक रिकॉर्ड है।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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