रविवार, 23 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
दुनिया

कांगो में इबोला का कहर: 500 से ज़्यादा मौतें, WHO ने इलाज के लिए शुरू किया क्लीनिकल ट्रायल

अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला का प्रकोप गंभीर रूप ले चुका है, जहाँ इस महामारी से मरने वालों की संख्या 500 के पार पहुँच गई है। बिगड़ते हालात के बीच, समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्

कांगो में इबोला का कहर: 500 से ज़्यादा मौतें, WHO ने इलाज के लिए शुरू किया क्लीनिकल ट्रायल
(फोटो: IANS)

अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला का प्रकोप गंभीर रूप ले चुका है, जहाँ इस महामारी से मरने वालों की संख्या 500 के पार पहुँच गई है। बिगड़ते हालात के बीच, समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक संभावित इलाज की खोज के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है।

विज्ञापन

देश के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, अब तक इबोला संक्रमण के कुल 1,561 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 506 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 254 मरीज पूरी तरह ठीक हो गए हैं। फिलहाल, 628 संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है और वे आइसोलेशन में हैं। इसके अलावा, 354 संदिग्ध मामलों की भी पहचान की गई है, जिनमें 110 मौतें हुई हैं।

संक्रमण का बढ़ता दायरा और इलाज की नई उम्मीद

यह संक्रमण अब तक तीन प्रांतों के 36 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है और हाल के हफ्तों में इसमें तेज़ी आई है। महामारी के 25वें और 26वें सप्ताह में 300 से ज़्यादा नए मामले सामने आए, जो इस प्रकोप की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक हैं। यह दर्शाता है कि सामुदायिक स्तर पर संक्रमण अभी भी तेज़ी से फैल रहा है।

इस चुनौती से निपटने के लिए, WHO ने गुरुवार को बुंडीबुग्यो इबोलावायरस से होने वाली बीमारी के इलाज के लिए एक क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने की जानकारी दी। फिलहाल इस वायरस के खिलाफ कोई भी स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार मौजूद नहीं है।

कैसे काम करेगा यह क्लीनिकल ट्रायल?

यह ट्रायल इतुरी प्रांत के रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्र स्थित सीएमई इबोला उपचार केंद्र में शुरू किया गया है, जिसे प्रकोप का केंद्र माना जा रहा है। WHO ने बताया कि अध्ययन में पहला प्रतिभागी भी शामिल हो चुका है। इस परीक्षण के दौरान यह जाँचा जाएगा कि क्या एंटीवायरल दवा 'रेमडेसिविर', प्रायोगिक एंटीबॉडी उपचार 'एमबीपी134', या दोनों का संयोजन मरीजों की जान बचाने में कारगर हो सकता है।

WHO के शोध सलाहकार डॉ. वसी मूर्ति के अनुसार, इलाज दिए जाने के बाद मरीजों की स्थिति पर 28 दिनों तक नज़र रखी जाएगी ताकि परिणामों का सही आकलन किया जा सके। इस महत्वपूर्ण परीक्षण में कांगो के राष्ट्रीय बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएनआरबी), ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और बेल्जियम के एंटवर्प इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठन सहयोग कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

N

News4Social वायर डेस्क

News4Social का वायर डेस्क समाचार एजेंसियों (IANS आदि) की लाइसेंस-प्राप्त फीड से ताज़ा व प्रामाणिक राष्ट्रीय, राज्य और विषय-आधारित खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर का स्रोत स्पष्ट रूप से श्रेय (credit) के साथ दिया जाता है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →