सोमवार, 10 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

12 साल से फरार, तमिलनाडु में पोल्ट्री फार्म चला रहा 50 हजार का इनामी जालसाज दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा

करीब 12 साल तक कानून से बचने वाला एक घोषित अपराधी आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आ गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 50,000 रुपये के इस इनामी जालसाज को तमिलनाडु से गिरफ्तार…

12 साल से फरार, तमिलनाडु में पोल्ट्री फार्म चला रहा 50 हजार का इनामी जालसाज दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा
(फोटो: IANS)

करीब 12 साल तक कानून से बचने वाला एक घोषित अपराधी आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आ गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 50,000 रुपये के इस इनामी जालसाज को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है, जहां वह अपनी पहचान छिपाकर एक पोल्ट्री फार्म चला रहा था। आरोपी मनोहरन कंधसामी को एक हाई-प्रोफाइल जालसाजी मामले में भगोड़ा घोषित किया गया था।

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पुलिस के मुताबिक, 62 वर्षीय मनोहरन को 4 अगस्त, 2026 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के तिरुचेंगोडे इलाके में एक गोदाम से पकड़ा गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच एक महीने से ज्यादा समय से तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस पर काम कर रही थी।

क्या था पूरा मामला?

इस केस की जड़ें साल 2007 के एक चोरी के मामले से जुड़ी हैं। हैदराबाद के रहने वाले विजय कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि धर्मशाला में उनके सोने के गहने और कीमती सामान चोरी हो गए थे। जांच के दौरान पुलिस ने कर्नाटक के मंगलुरु निवासी मनोहरन कंधसामी को पकड़ा। हालांकि, उसके पास से चोरी का सामान तो नहीं मिला, लेकिन कई जाने-माने राजनीतिक कार्यालयों और सरकारी अधिकारियों के नाम पर बने नकली लेटरहेड बरामद हुए।

जांच में सभी दस्तावेज जाली पाए जाने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का एक अलग मामला (FIR नंबर 33/2008) दर्ज किया और दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।

जमानत के बाद हुआ था फरार

इस मामले में मनोहरन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, लेकिन करीब एक महीने बाद उसे जमानत मिल गई। इसके बाद वह दोबारा जेल जाने के डर से अदालत में पेश होना बंद कर दिया और फरार हो गया। लगातार गैर-हाजिर रहने पर पटियाला हाउस कोर्ट ने 2014 में उसे 'अपराधी' घोषित कर दिया और बाद में उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम भी रखा गया।

पूछताछ में मनोहरन ने बताया कि उसने अपने सभी पुराने संपर्क तोड़ दिए थे और परिवार के साथ तमिलनाडु में बस गया था, जहां वह पोल्ट्री का काम करके अपना जीवन चला रहा था। डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम ने कहा कि तकनीकी निगरानी और अंतर-राज्यीय समन्वय से यह साबित हुआ है कि कोई भी ठिकाना कानून की पहुंच से बाहर नहीं है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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