गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर वरिष्ठ नागरिक से ₹25 लाख की ठगी, CBI ने एक आरोपी को राजकोट से पकड़ा

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हुई एक बड़ी साइबर धोखाधड़ी के मामले में एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई ने हरियाणा के करनाल निवास

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर वरिष्ठ नागरिक से ₹25 लाख की ठगी, CBI ने एक आरोपी को राजकोट से पकड़ा
(फोटो: IANS)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हुई एक बड़ी साइबर धोखाधड़ी के मामले में एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई ने हरियाणा के करनाल निवासी एक आरोपी को गुजरात के राजकोट से 30 जून को पकड़ा। यह कार्रवाई एक वरिष्ठ नागरिक से 25.65 लाख रुपये ठगने के मामले में की गई है।

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आरोपियों ने खुद को सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया था। उन्होंने पीड़ित को डराया कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में हुआ है और अगर उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कैसे दिया ठगी को अंजाम?

धोखाधड़ी करने वालों ने पीड़ित को धमकाते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने की भी बात कही। अपने झांसे को असली दिखाने के लिए उन्होंने एक नकली संपत्ति कुर्की का आदेश (अटैचमेंट ऑर्डर) भी भेजा। लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक दबाव के चलते वरिष्ठ नागरिक ने दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल 25.65 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

जांच और अब तक की रिकवरी

यह मामला पहले मध्य प्रदेश पुलिस की राज्य साइबर अपराध शाखा, भोपाल में दर्ज था। बाद में, सर्वोच्च न्यायालय के 1 दिसंबर 2025 के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई, जिसने 11 अप्रैल 2026 को मामला फिर से दर्ज किया। सीबीआई ने तकनीकी और वित्तीय सबूतों के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे राजकोट से गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने बताया कि अदालत से अनुमति मिलने के बाद पीड़ित को ठगी गई राशि में से 2.65 लाख रुपये वापस दिलाने में भी सफलता मिली है।

CBI की अपील और जांच की दिशा

सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में जांच अभी जारी है। एजेंसी इस साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश कर रही है। सीबीआई ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे 'डिजिटल अरेस्ट', फर्जी निवेश योजनाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर आने वाले नकली कॉल्स से सावधान रहें। एजेंसी ने सलाह दी है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को तुरंत दें।

इनपुट: IANS

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