जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक राज्यसभा से पारित, सरकार बोली- 'भूत मतदाताओं' से छुटकारा मिलेगा
जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव को संसद की मंजूरी मिल गई है। मंगलवार को राज्यसभा ने 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित कर दिया, जिसे पहले…
जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव को संसद की मंजूरी मिल गई है। मंगलवार को राज्यसभा ने 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित कर दिया, जिसे पहले लोकसभा से मंजूरी मिल चुकी थी। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का एक बड़ा उद्देश्य देश को 'भूत मतदाताओं' से छुटकारा दिलाना है, यानी ऐसे लोगों को मतदाता सूची से हटाना जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन रिकॉर्ड में वे अब भी जीवित हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, हंगामे के बीच विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसके प्रावधानों और उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी।
नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि "भारत माता की गोद में जन्म लेने वाले हर बच्चे का पंजीकरण निश्चित रूप से हो" और साथ ही, "जिसकी मृत्यु हो जाए, वह मृत्यु के बाद भी रिकॉर्ड में जीवित रहकर तुष्टिकरण करने वाली पार्टियों का मतदाता न बना रहे।" उन्होंने जोर देकर कहा, "यह देश अब ऐसे ‘भूत मतदाताओं’ से छुटकारा चाहता है।"
विलंब से पंजीकरण के नियमों में बदलाव
विधेयक में पंजीकरण में देरी होने पर नियमों को और सख्त किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जन्म या मृत्यु के 21 दिन के भीतर पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेगी। 22 से 30 दिन और 30 दिन से एक वर्ष तक की देरी के लिए भी पुरानी व्यवस्था को बरकरार रखा गया है।
हालांकि, एक अहम बदलाव यह किया गया है कि अगर जन्म या मृत्यु की सूचना देने में दो साल से अधिक की देरी होती है, तो अब पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही हो सकेगा। पहले एक वर्ष से अधिक की देरी पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट आदेश देते थे। मंत्री ने कहा कि यह बदलाव विलंबित पंजीकरण और उसके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए किया गया है।
पंजीकरण के आंकड़ों और प्रक्रिया पर सरकार का पक्ष
नित्यानंद राय ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि 1986 में जन्म पंजीकरण का स्तर सिर्फ 31.6% था, जो 2023 में बढ़कर 99% से अधिक हो गया है। इसी तरह, मृत्यु पंजीकरण 1974 के 72% से बढ़कर अब 99.4% पर पहुंच गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून से ईमानदार लोगों के लिए व्यवस्था और सरल होगी क्योंकि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। देश भर में साढ़े तीन लाख से अधिक पंजीकरण केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों की सरकारें पहले आसानी से जन्म प्रमाण पत्र दे देती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
इनपुट: IANS



