सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाने पर विपक्ष का हमला, सरकार पर 'तानाशाही' का आरोप
NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस और शिवसेना…
NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला और तानाशाही करार दिया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुंबई में मीडिया से बात करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस घटना पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “अगर लोकतांत्रिक तरीकों से शुरू हुए आंदोलन भी सरकार को मंजूर नहीं हैं, तो यह साफ है कि इस देश में जो शुरू हुआ है वह डेमोक्रेसी नहीं, बल्कि डिक्टेटरशिप है।”
“शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बजाय प्रदर्शनकारी पर कार्रवाई”
सपकाल ने NEET पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया, “जब पेपर लीक होते हैं तो संबंधित मंत्रालय के मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। नीट पेपर लीक होने के बाद शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया?” उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने “फेल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के बजाय, सोनम वांगचुक को प्रोटेस्ट साइट से जबरदस्ती हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती” कराया है, जो कि अलोकतांत्रिक है।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा ब्रिटिश शासन के दौरान भी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “आज जिस तरह से सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया गया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था... भाजपा हमारे देश में सबसे खराब तरह की तानाशाही लेकर आई है।”
वहीं, हर्षवर्धन सपकाल ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक बयान पर टिप्पणी करते हुए सरकार पर गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी, बार-बार पेपर लीक, राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला अत्याचार और किसानों की समस्याएं जैसे गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन सरकार “हर मामले में भारत बनाम पाकिस्तान” और विभाजनकारी राजनीति करती है।
इनपुट: IANS



