सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास का दिल्ली पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप, CJI और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जांच की मांग

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दिल्ली पुलिस और CRPF कर्मियों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान दुर्व्यवहार करने और जबरन हिरासत में लेने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS की…

राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास का दिल्ली पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप, CJI और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जांच की मांग
(फोटो: IANS)

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दिल्ली पुलिस और CRPF कर्मियों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान दुर्व्यवहार करने और जबरन हिरासत में लेने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले को लेकर उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर न्यायिक निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है।

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ब्रिटास ने अपने पत्र में बताया कि जब वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे एक लोकतांत्रिक आंदोलन के संबंध में पत्रकारों से बात कर रहे थे, तब यह घटना हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन लगभग 50 मीटर तक घसीटा और उनकी पहचान बताने के बावजूद उनके साथ दुर्व्यवहार जारी रखा।

हिरासत और मारपीट का आरोप

सांसद का दावा है कि पुलिस ने उन्हें उठाकर एक वाहन में डाल दिया, जहां उनके साथ मारपीट भी की गई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य होने की जानकारी देने के बाद भी उनके साथ अपमानजनक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने वाला व्यवहार किया गया। जॉन ब्रिटास के अनुसार, बाद में एक वरिष्ठ डीसीपी के निर्देश पर उन्हें यह कहकर छोड़ दिया गया कि उनकी हिरासत गैरकानूनी थी। उन्होंने बताया कि रिहाई के बाद भी उन्हें शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।

स्वतंत्र जांच और सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग

अपने पत्र में ब्रिटास ने मामले में शामिल पुलिसकर्मियों, इस्तेमाल हुए वाहन, दिए गए आदेशों और प्रत्यक्षदर्शियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ से अलग अधिकारियों वाली एक विशेष जांच टीम (SIT) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध किया है। साथ ही, उन्होंने मीडिया और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर और वायरलेस लॉग जैसे सभी सबूतों को सुरक्षित रखने की भी अपील की है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

जॉन ब्रिटास ने इस घटना को नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बताया है। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया से बात कर रहे किसी व्यक्ति को इस तरह जबरन उठाया जा सकता है, तो यह आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह घटना सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए निर्देशों के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें कहा गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानून के अनुसार ही हिरासत में लिया जा सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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