दिल्ली-एनसीआर: 'पजेशन तक नो EMI' स्कीम के नाम पर घर खरीदारों से धोखाधड़ी, ED ने बिल्डरों पर कसा शिकंजा
दिल्ली-एनसीआर में घर का सपना देख रहे सैकड़ों खरीदारों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने गुरुवार को दो बिल्डर समूहों और बैंकों के बीच कथि…
दिल्ली-एनसीआर में घर का सपना देख रहे सैकड़ों खरीदारों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने गुरुवार को दो बिल्डर समूहों और बैंकों के बीच कथित गठजोड़ से जुड़े मामलों में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। इन बिल्डरों पर 'सबवेंशन स्कीम' की आड़ में ग्राहकों के साथ धोखा करने का आरोप है।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह जांच एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक दो रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ की जा रही है। बिल्डरों ने 'कब्जा मिलने तक कोई ईएमआई नहीं' जैसी आकर्षक योजनाएं पेश की थीं, जिसके झांसे में आकर बड़ी संख्या में लोगों ने हाउसिंग लोन लेकर फ्लैट बुक कराए।
कैसे हुई घर खरीदारों से धोखाधड़ी?
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आया कि बिल्डरों ने इन योजनाओं के तहत ग्राहकों से पैसा तो ले लिया, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें उनके सपनों का घर नहीं सौंपा। इस वजह से घर खरीदारों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि उन्हें बिना घर मिले ही लोन की किस्तें भरनी पड़ रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई जांच
ED की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत हो रही है। इसकी बुनियाद CBI द्वारा दर्ज की गई दो FIR हैं। ये FIR सुप्रीम कोर्ट द्वारा हिमांशु सिंह बनाम भारत संघ व अन्य मामले में 29 अप्रैल, 2025 को पारित एक आदेश के बाद दर्ज की गई थीं। ED ने इन्हीं FIR के आधार पर अपनी जांच शुरू की और तलाशी अभियान चलाया।
इसी बीच, ED ने एक अन्य मामले में 12 अगस्त को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के सिलसिले में रायपुर में भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने रामगोपाल अग्रवाल को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था, जिन्हें एक अदालत ने सात दिन की ED हिरासत में भेज दिया है।
इनपुट: IANS



