चुनावी हलफनामे में आपराधिक केस छिपाने का आरोप, मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस
मध्य प्रदेश में सेवढ़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोपों को लेकर मध्य…
मध्य प्रदेश में सेवढ़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने उन्हें नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विधायक ने जानबूझकर अपने ऊपर दर्ज केसों का खुलासा नहीं किया, इसलिए उनका निर्वाचन रद्द किया जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह याचिका दतिया के दीपक बेलपत्री और विनोद शर्मा ने दायर की है। उनका आरोप है कि घनश्याम सिंह ने 2023 के विधानसभा चुनाव में दिए गए हलफनामे में अपने खिलाफ लंबित चार मामलों में से किसी का भी जिक्र नहीं किया। याचिका में 1991 के एक आपराधिक मामले का भी उल्लेख है, जिसे कथित तौर पर छिपाया गया।
क्या हैं प्रमुख आरोप?
याचिकाकर्ताओं के वकील मनोज उपाध्याय ने बताया कि चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार के लिए अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होता है। वकील के मुताबिक, घनश्याम सिंह ने न केवल 2023 के चुनाव में जानकारी छिपाई, बल्कि 2026 में दतिया से लड़े उपचुनाव के हलफनामे में भी चार में से सिर्फ दो मामलों का ही खुलासा किया। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर उनकी विधायकी को अदालत में चुनौती दी गई है।
दिलचस्प बात यह है कि वकील ने कांग्रेस के ही पूर्व विधायक राजेंद्र भारती का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि भारती भी उसी मामले में सह-आरोपी हैं, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम है। जब राजेंद्र भारती ने 2023 में चुनाव लड़ा, तो उन्होंने अपने शपथ-पत्र में इस मामले का उल्लेख किया था, लेकिन घनश्याम सिंह ने ऐसा नहीं किया।
अब आगे क्या होगा?
यह याचिका पहले जबलपुर हाईकोर्ट में दायर की गई थी, जिसे बाद में सुनवाई के लिए ग्वालियर बेंच में स्थानांतरित कर दिया गया। अब ग्वालियर बेंच ने मामले का संज्ञान लेते हुए विधायक घनश्याम सिंह समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगर अदालत में यह साबित हो जाता है कि आपराधिक मामलों की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई थी, तो उनकी विधायकी रद्द भी हो सकती है। फिलहाल, सभी की नजरें इस मामले में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
इनपुट: IANS



