शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

भारत में बनेंगे 3 केमिकल पार्क: कैबिनेट ने 'भव्य-रसायन योजना' को दी मंज़ूरी, जानें क्या है पूरी स्कीम

भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'भव्य-रसायन योजना' को अपनी मंज़ूरी…

भारत में बनेंगे 3 केमिकल पार्क: कैबिनेट ने 'भव्य-रसायन योजना' को दी मंज़ूरी, जानें क्या है पूरी स्कीम
(फोटो: IANS)

भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'भव्य-रसायन योजना' को अपनी मंज़ूरी दे दी है, जिसके तहत देश में तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

विज्ञापन

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का वित्तीय आवंटन किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर वित्त वर्ष 2030-31 तक, यानी पाँच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी। इस योजना की घोषणा वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी।

क्या है पार्कों की फंडिंग और संरचना?

इस योजना के तहत केंद्र सरकार हर एक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। यह अनुदान तब जारी होगा जब संबंधित राज्य सरकार अपनी ओर से न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करेगी। पार्कों की स्थापना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए के बजट में से 3,000 करोड़ रुपए पार्क के अंदर की बुनियादी सुविधाओं और ज़रूरतों पर खर्च होंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक कार्यों के लिए रखे गए हैं।

इन पार्कों का विकास एक प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन-आधारित वित्तपोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से राज्य सरकारों की सहायता से किया जाएगा। हर पार्क के लिए कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (यानी न्यूनतम 2,000 एकड़) की अविभाजित भूमि की आवश्यकता होगी।

उद्योग और अर्थव्यवस्था को क्या लाभ मिलेंगे?

इन पार्कों को आधुनिक 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर और मज़बूत पर्यावरण सुरक्षा उपायों के साथ विकसित करने की योजना है। उम्मीद है कि इससे उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आएगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे कच्चे माल की सोर्सिंग से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति की पूरी वैल्यू चेन को बढ़ावा मिलेगा।

साझा बुनियादी ढाँचे जैसे अपशिष्ट उपचार संयंत्र और खतरनाक कचरा प्रबंधन सुविधाएँ होने से पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल रासायनिक उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी, बल्कि कृषि, कपड़ा, फार्मा, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी रोज़गार के अवसर पैदा करेगी। यह कदम 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक माना जा रहा है।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →