सपा पर ब्रजेश पाठक का बड़ा हमला: 'ब्राह्मणों का वोट चाहिए, लेकिन सत्ता सिर्फ परिवार के लिए'
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर ब्राह्मण समाज को केवल वोट बैंक समझने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सपा को चुनाव के समय ही ब्राह्मणों की याद आती है…
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर ब्राह्मण समाज को केवल वोट बैंक समझने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सपा को चुनाव के समय ही ब्राह्मणों की याद आती है, लेकिन सत्ता में आने पर सारा लाभ एक ही परिवार तक सीमित रह जाता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पाठक ने यह टिप्पणी सपा द्वारा आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन और जनेश्वर मिश्र जयंती कार्यक्रम के संदर्भ में की।
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए ब्रजेश पाठक ने सपा की राजनीति की तुलना अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति से की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "ब्राह्मण वोट देकर सत्ता दिलाएं और उस सत्ता पर सपा अपने परिवार की 'खड़ाऊं' रखकर शासन करे, यही उसकी राजनीति बन गई है।"
जनेश्वर मिश्र की विरासत का अपमान?
पाठक ने आरोप लगाया कि जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम उनके समाजवादी विचारों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर होना चाहिए था। इसके बजाय, कार्यक्रम में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमलों पर अधिक ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल 'छोटे लोहिया' जनेश्वर मिश्र की विरासत का अपमान हुआ, बल्कि पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा को भी ठेस पहुंची। उन्होंने कहा, "मुझे जितनी गालियां देनी हों दीजिए, लेकिन ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस मत पहुंचाइए।"
'संसदीय परंपराओं का सम्मान नहीं करती सपा'
उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि मौजूदा समाजवादी पार्टी अपने संस्थापकों डॉ. राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के आदर्शों से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता सदन में सार्थक बहस के पक्षधर थे, जबकि आज की सपा विधानसभा और संसद में जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय हंगामा और अवरोध पैदा करती है। पाठक ने कहा कि विपक्ष संविधान की प्रति लेकर तस्वीरें तो खिंचवाता है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और संसदीय परंपराओं का सम्मान नहीं करता।
ब्रजेश पाठक ने सपा नेताओं को डॉ. लोहिया और जनेश्वर मिश्र के विचारों का अध्ययन करने की नसीहत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी संवाद की संस्कृति छोड़कर अराजक राजनीति की राह पर चल पड़ी है, जहाँ चुनाव खत्म होते ही ब्राह्मण समाज उपेक्षा का शिकार हो जाता है।
इनपुट: IANS



