बिहार पंचायत टैक्स: RJD सांसद सुधाकर सिंह ने 'जजिया कर' से की तुलना, इसे गरीबों पर नया बोझ बताया
बिहार में ग्रामीण पंचायतों द्वारा टैक्स लगाए जाने के फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कदम को गरीब ग्रामीणों पर एक अतिरिक्त बोझ बताते हुए इसकी…
बिहार में ग्रामीण पंचायतों द्वारा टैक्स लगाए जाने के फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कदम को गरीब ग्रामीणों पर एक अतिरिक्त बोझ बताते हुए इसकी तुलना मुगल काल के 'जजिया टैक्स' से कर दी है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों के साथ अन्याय है जो पहले से ही गरीबी और महंगाई से जूझ रहे हैं।
सुधाकर सिंह ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांवों में लोग पहले ही बिजली, मोबाइल और नमक जैसी जरूरी चीजों पर टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में उन पर एक और नया टैक्स लगाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हकीकत बयां करते हुए कहा, "गरीब किसानों के पास नकद पैसे नहीं होते। वे खेती से मिली उपज से ही अपना गुजारा करते हैं और थोड़ी-बहुत बचत होने पर कपड़े जैसी जरूरतें पूरी करते हैं।"
पंचायतों की आत्मनिर्भरता या भ्रष्टाचार का नया रास्ता?
राजद सांसद ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टैक्स को जरूरी बताया गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में पंचायतों के लिए हर साल करीब 12,500 करोड़ रुपए का बजट पहले से ही आवंटित होता है। सिंह ने आशंका जताई कि टैक्स वसूली के नाम पर गांवों में नए कर्मचारी भेजे जाएंगे, जिससे केवल भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना
इस बातचीत के दौरान सुधाकर सिंह ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को घेरा। NEET परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं, लेकिन सरकार ने न तो माफी मांगी और न ही दोषियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई की। उन्होंने इसे लोकतंत्र की भावना के खिलाफ बताया।
इसके अलावा, उन्होंने सोनम वांगचुक के अनशन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के RSS पर दिए बयान और परिसीमन के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में सभी संगठनों के लिए एक समान कानून होना चाहिए और परिसीमन जैसे राष्ट्रीय विषय पर किसी भी तरह के भेदभाव का उनकी पार्टी विरोध करेगी।
इनपुट: IANS



