रक्षा संबंधों में नया अध्याय: भारत और जर्मनी ने पहली वायु सेना स्टाफ वार्ता की
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूती देते हुए दोनों देशों की वायु सेनाओं ने नई दिल्ली में अपनी पहली 'एयर स्टाफ वार्ता' आयोजित की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह चार दिवसीय संवाद 11…
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूती देते हुए दोनों देशों की वायु सेनाओं ने नई दिल्ली में अपनी पहली 'एयर स्टाफ वार्ता' आयोजित की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह चार दिवसीय संवाद 11 अगस्त को शुरू हुआ और इसे दोनों देशों के द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस पहली वार्ता का मुख्य उद्देश्य आपसी सैन्य सहयोग को गहरा करना और भविष्य में साझेदारी के नए रास्ते तलाशना था। भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को इस आयोजन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह वार्ता दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
बैठक के दौरान सैन्य प्रशिक्षण, परिचालन स्तर पर अनुभवों का आदान-प्रदान और सैन्य क्षमताओं के विकास जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों वायु सेनाओं के बीच नियमित संवाद और पेशेवर अनुभवों को साझा करने से आपसी समझ और परिचालन तालमेल को और बेहतर बनाने की नींव रखी गई है।
पहले से मजबूत सैन्य साझेदारी
यह पहली स्टाफ-स्तरीय वार्ता भले ही अब हुई हो, लेकिन भारत और जर्मनी के बीच वायु क्षेत्र में सहयोग पहले से ही मौजूद है। इसका एक बड़ा उदाहरण इसी साल 2024 में भारत में आयोजित 'तरंग शक्ति' बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास था, जिसमें जर्मन वायुसेना ने अपने यूरोफाइटर और ए400एम विमानों के साथ हिस्सा लिया था। इस तरह की संस्थागत बातचीत सैन्य अभ्यासों के पूरक के तौर पर काम करती है, जिससे दोनों देश अपनी परिचालन जरूरतों और भविष्य की योजनाओं पर नियमित चर्चा कर पाते हैं।
इसी बीच, भारत ने इंडोनेशिया के साथ भी 11 से 13 अगस्त तक 'आर्मी टू-आर्मी स्टाफ वार्ता' की। इस बातचीत का मकसद भी दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाना, संयुक्त प्रशिक्षण का दायरा विस्तृत करना और आपसी संबंधों को और मजबूत करना था।
इनपुट: IANS



