भारत की BRICS अध्यक्षता: एक साल के संवाद, सहयोग और स्थिरता की पूरी झलक शिखर सम्मेलन से पहले जारी
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, भारत ने अपनी अध्यक्षता के एक साल पूरे होने पर किए गए कार्यों का ब्योरा जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक वीडियो के माध्यम से बताया कि इस दौरान संवाद…
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, भारत ने अपनी अध्यक्षता के एक साल पूरे होने पर किए गए कार्यों का ब्योरा जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक वीडियो के माध्यम से बताया कि इस दौरान संवाद, सहभागिता और सहयोग को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया, जिसका केंद्र चार प्रमुख स्तंभों पर था: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन्हीं चार स्तंभों ने भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को परिभाषित किया है।
मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए वीडियो में कहा गया है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए संवाद और सहभागिता का एक पूरा वर्ष सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसमें यह संदेश भी दिया गया कि 'भविष्य पहले से तय नहीं होता है, इसका हम निर्माण करते हैं।' क्लिप में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि आज के अनिश्चित समय में एकजुटता और मिलकर आगे बढ़ने की शक्ति ही लोगों को संवाद के जरिए समस्याएं सुलझाने के लिए प्रेरित कर रही है।
चार स्तंभों पर केंद्रित रही अध्यक्षता
भारत ने अपनी अध्यक्षता के प्रतीक कमल के आकार के चिह्न के माध्यम से इन चार स्तंभों को परिभाषित किया है। पहला स्तंभ 'लचीलापन' है, जो वैश्विक संकटों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है। दूसरा स्तंभ 'नवाचार' है, जिसके तहत तकनीक, नए समाधान और स्टार्ट-अप फंड को बढ़ावा दिया गया। तीसरा स्तंभ सदस्य देशों के बीच 'सहयोग' और साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ को नेतृत्व की भूमिका में लाना है। चौथा स्तंभ 'स्थिरता' है, जो दीर्घकालिक, समावेशी और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास को प्रेरित करता है।
विस्तार और बैठकों का दौर
इस एक साल की यात्रा में ब्रिक्स का विस्तार भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। जो समूह दो दशक पहले चार देशों के गठबंधन के रूप में शुरू हुआ था, वह अब 11 देशों का एक बड़ा मंच बन चुका है। भारत चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है। अपनी अध्यक्षता के दौरान, भारत ने सदस्य देशों के 30 शहरों में 400 से ज़्यादा बैठकें आयोजित कीं, जिसमें कई राज्यों ने अलग-अलग समय पर ज़िम्मेदारी निभाई। इन बैठकों के माध्यम से विकासशील देशों के साझा हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मज़बूती प्रदान करने का प्रयास किया गया।
इनपुट: IANS



