भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार 50 अरब डॉलर के पार, अंतरिक्ष सहयोग भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने पहली बार 50 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है। यह उपलब्धि 2022 में लागू हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के बाद हासिल हुई…
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने पहली बार 50 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है। यह उपलब्धि 2022 में लागू हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के बाद हासिल हुई है, जिसने दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी को भी नई गति दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISरो) और ऑस्ट्रेलियन स्पेस एजेंसी (ASA) के बीच सहयोग को वैश्विक साझेदारियों में 'सर्वोच्च स्तर' का बताया है।
ऑस्ट्रेलियाई व्यापार और निवेश आयोग के आयुक्त नाथन डेविस ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत व्यापार में यह अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। उन्होंने बताया कि इस समझौते ने अंतरिक्ष इकोसिस्टम को भी मजबूती से समर्थन दिया है, खासकर पिछले कुछ वर्षों में जब भारत में आयात पर लगने वाले टैरिफ में सुधार हुआ है।
इसरो और ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी की साझेदारी
नाथन डेविस के मुताबिक, इसरो और एएसए के बीच अंतरिक्ष सहयोग को लेकर एक हस्ताक्षरित समझौता (MoU) मौजूद है। उन्होंने इस संबंध को वैश्विक साझेदारियों के उच्चतम स्तर पर रखते हुए कहा, "यह हमारी अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य देशों के बीच बहुत कम द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं में से एक है।" उन्होंने यह भी बताया कि 2021 में दोनों देशों ने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे, जो कई क्षेत्रों में करीबी सहयोग को बढ़ावा देता है।
एक-दूसरे के पूरक हैं दोनों देश
इस साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए डेविस ने कहा कि दोनों देशों के इकोसिस्टम एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। उन्होंने बताया, "ऑस्ट्रेलिया के पास कच्चे माल के प्रचुर संसाधन हैं, जो भारत के विशाल विनिर्माण इकोसिस्टम की सप्लाई चेन के लिए उपयोगी हो सकते हैं।" इसी तरह, दोनों देशों की टेक्नोलॉजी कंपनियां एक-दूसरे को समर्थन दे सकती हैं। डेविस ने ऑस्ट्रेलिया में 10 लाख से अधिक की संख्या वाले भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका को भी सराहा।
ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष इकोसिस्टम की क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास विश्वविद्यालयों में गहन शोध से लेकर लॉन्च, सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग, अर्थ ऑब्जर्वेशन और इन-स्पेस मैन्युफैक्चरिंग जैसी अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम प्रौद्योगिकियां मौजूद हैं।
इनपुट: IANS



