गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
संस्कृति

कुल्लू दशहरा: भव्य रथयात्रा और 'जय श्रीराम' के जयकारों के साथ अंतर्राष्ट्रीय उत्सव का आगाज़

हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध कुल्लू घाटी एक बार फिर आस्था और परंपरा के रंगों से सराबोर है। यहाँ के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव का…

कुल्लू दशहरा: भव्य रथयात्रा और 'जय श्रीराम' के जयकारों के साथ अंतर्राष्ट्रीय उत्सव का आगाज़
(फोटो: IANS)

हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध कुल्लू घाटी एक बार फिर आस्था और परंपरा के रंगों से सराबोर है। यहाँ के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव का शुभारंभ हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को इस अवसर पर हज़ारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जिन्होंने 'जय श्रीराम' के जयघोष के साथ भगवान के रथ को खींचा।

विज्ञापन

यह उत्सव घाटी की अनूठी देव संस्कृति का प्रतीक है, जहाँ मुख्य देवता भगवान रघुनाथ के साथ अन्य देवी-देवता भी शामिल होते हैं। बुधवार दोपहर लगभग 4 बजे, भगवान रघुनाथ रघुनाथपुर स्थित अपने मंदिर से ढालपुर के रथ मैदान पहुँचे और रथ पर सवार हुए। इस दौरान उनके छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और राज परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच, पुजारी ने पारंपरिक देव अनुष्ठानों का निर्वहन किया।

देवताओं का महामिलन

इस शोभायात्रा में क्षेत्र के दर्जनों देवी-देवताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें माता हिडिंबा, देवता बिजली महादेव, देवता आदि ब्रह्म, देवता कार्तिक स्वामी, देवता नाग धूमल, देवता वीर नाथ, देवता बीर केला, माता गायत्री, माता त्रिपुर सुंदरी और माता काली ओडी प्रमुख रूप से शामिल हुए। रथ मैदान से भगवान रघुनाथ को उनके अस्थायी शिविर तक ले जाया गया, जहाँ अगले सात दिनों तक उनकी विशेष पूजा-अर्चना होगी।

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि उत्सव के समापन पर लंका दहन की रस्म के बाद भगवान वापस अपने मंदिर लौटेंगे। इस बीच श्रद्धालु ढालपुर स्थित शिविर में उनके दर्शन कर सकेंगे।

देश-विदेश से पहुँचे श्रद्धालु

इस आयोजन का आकर्षण केवल स्थानीय लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश से भी पर्यटक और श्रद्धालु यहाँ पहुँचे हैं। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने इसे देवी-देवताओं से जुड़ी एक प्राचीन परंपरा बताते हुए कहा कि इस भव्य यात्रा को देखकर ऐसा लगता है मानो देवता स्वर्ग से सीधे धरती पर उतर आए हों।

लखनऊ से आए मोहित और मुंबई की जेनिफर जैसे पर्यटकों ने इस अनुभव को अविस्मरणीय और मनमोहक बताया। वहीं, फ्रांस से आए एलेक्स ने यहाँ की देव संस्कृति को अनूठा बताते हुए कहा कि उन्हें इस यात्रा के माध्यम से इसे जानने का अवसर मिला।

इनपुट: IANS

N

News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से धर्म और संस्कृति से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →