पश्चिम बंगाल: 10 TMC बागी विधायकों की अयोग्यता का मामला तकनीकी पेंच में फंसा, स्पीकर ने मांगा नया आवेदन
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला फिलहाल टल गया है। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस मामले में दायर याचिका में प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए…
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला फिलहाल टल गया है। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस मामले में दायर याचिका में प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता से नए सिरे से आवेदन करने को कहा है। इन बागी विधायकों के समूह का नेतृत्व विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, स्पीकर ने गुरुवार को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई के बाद यह फैसला लिया, जिसकी घोषणा शुक्रवार सुबह की गई। स्पीकर ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए है और इसका बागी विधायकों पर लगे दलबदल के आरोपों की सत्यता से कोई लेना-देना नहीं है।
याचिका में क्या थी तकनीकी गलती?
यह याचिका तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने दायर की थी, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गुट का एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। जांच में पाया गया कि मूल आवेदन तो नियमों के अनुसार सही था, लेकिन उसके साथ संलग्न दस्तावेजों के सत्यापन और उन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया में चूक हुई थी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के नियमों के मुताबिक, याचिका के साथ लगे हर दस्तावेज़ के प्रत्येक पन्ने पर उसी तरह हस्ताक्षर और सत्यापन होना ज़रूरी है, जैसे मूल आवेदन पर होता है। सूत्रों ने बताया कि इस मामले में इस नियम का पालन नहीं किया गया था, जिसके चलते स्पीकर ने प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए नया आवेदन मांगा है।
अयोग्यता के आरोपों पर स्पीकर ने क्या कहा?
स्पीकर रथींद्र बोस ने अपने आदेश में विधायकों पर लगे दलबदल के आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इसका मतलब यह है कि उन्होंने इस बात पर कोई फैसला नहीं दिया है कि ये विधायक दलबदल के दोषी हैं या नहीं। सोवनदेब चट्टोपाध्याय को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए फिर से याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी गई है, जिसके बाद ही इस मामले पर आगे की कार्रवाई होगी।
इनपुट: IANS



