दो दशक बाद बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत दौरा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर होगी नज़र
करीब बीस साल के अंतराल के बाद बेल्जियम के कोई प्रधानमंत्री भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर बुधवार से भारत के तीन दिवसीय दौरे पर होंगे, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…
करीब बीस साल के अंतराल के बाद बेल्जियम के कोई प्रधानमंत्री भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर बुधवार से भारत के तीन दिवसीय दौरे पर होंगे, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, फरवरी 2025 में पद संभालने के बाद यह डी वेवर की पहली भारत यात्रा है, जिसे दोनों देशों के बीच पारंपरिक आर्थिक संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश के साथ-साथ रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और समुद्री संपर्क जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। डी वेवर के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है, जिसमें रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन के अलावा उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
व्यापार और निवेश: हीरा कारोबार से आगे
भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक संबंधों का सबसे प्रसिद्ध पहलू हीरा कारोबार रहा है। बेल्जियम का एंटवर्प शहर जहां वैश्विक हीरा व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है, वहीं भारत का सूरत कटिंग और पॉलिशिंग के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 13.01 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इसके अलावा, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में बेल्जियम से लगभग 4.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी आया।
प्रधानमंत्री डी वेवर अपनी यात्रा के अंतिम दिन, 4 सितंबर को मुंबई का दौरा करेंगे, जहां उनके भारत डायमंड बोर्स जाने की भी योजना है। यह दौरा दोनों देशों के बीच हीरा उद्योग में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने के लिहाज से प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण है।
रक्षा और रणनीति में बढ़ता सहयोग
पारंपरिक रूप से व्यापार पर केंद्रित रहे इन द्विपक्षीय संबंधों में अब रक्षा और सुरक्षा का आयाम भी तेजी से जुड़ रहा है। बेल्जियम के रक्षा मंत्री की मौजूदगी इस यात्रा के रक्षा-संबंधी महत्व को रेखांकित करती है। यह यात्रा दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक तंत्र के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। नई दिल्ली में बेल्जियम द्वारा रक्षा अताशे की नियुक्ति को भी इसी बदलती प्राथमिकता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
जुलाई 2026 में दोनों देशों ने पहली बार मंत्री स्तर पर रणनीतिक संवाद शुरू किया था, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवो ने की थी। यह तंत्र द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर नियमित बातचीत का एक मंच प्रदान करता है।
प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा में साझेदारी
भारत-बेल्जियम सहयोग अब नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर रहा है। मार्च 2023 में उत्तराखंड के नैनीताल में स्थापित हुए दुनिया के सबसे बड़े लिक्विड मिरर टेलीस्कोप के निर्माण में बेल्जियम की कंपनी एएमओएस की अहम भूमिका थी। इसी तरह, बेल्जियम की कंपनी जॉन कॉकरिल आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में 2 गीगावॉट की क्षमता वाली एक बड़ी इलेक्ट्रोलाइजर उत्पादन इकाई का निर्माण कर रही है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
सदियों पुराने संबंध और भविष्य की राह
भारत और बेल्जियम के रिश्ते तीन शताब्दियों से भी अधिक पुराने हैं, और बेल्जियम स्वतंत्र भारत के साथ सितंबर 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले शुरुआती यूरोपीय देशों में से एक था। आज बेल्जियम में भारतीय मूल के लगभग 35,000 लोग रहते हैं और वहां के विश्वविद्यालयों में 1,131 भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं। बेल्जियम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर उसके सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इनपुट: IANS



