शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बाराबंकी: घाघरा की कटान से हेतमापुर गांव में तबाही, 10 घर नदी में समाए, मंदिर-मस्जिद पर भी खतरा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में घाघरा नदी का जलस्तर थोड़ा कम होने के बावजूद, रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव के निवासियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नदी…

बाराबंकी: घाघरा की कटान से हेतमापुर गांव में तबाही, 10 घर नदी में समाए, मंदिर-मस्जिद पर भी खतरा
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में घाघरा नदी का जलस्तर थोड़ा कम होने के बावजूद, रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव के निवासियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नदी की तेज धारा के कारण भीषण कटान हो रही है, जिससे अब तक 10 पक्के मकान नदी में समा चुके हैं। लोग अपनी आंखों के सामने अपने घरों को ढहते और जीवन भर की कमाई को बहते देखने के लिए मजबूर हैं।

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नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से करीब 14 सेंटीमीटर ऊपर है, और इसकी तेज धार लगातार गांव की जमीन को काट रही है। इस अप्रत्याशित तबाही ने ग्रामीणों को बेबस कर दिया है। कुछ लोग अपना सामान बचाने के लिए खुद ही अपने आशियाने तोड़ रहे हैं, ताकि कुछ हिस्सा बचाया जा सके। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर प्रशासन के खिलाफ गुस्सा भी है और वे कटान रोकने के लिए प्रभावी उपायों की मांग कर रहे हैं।

धार्मिक स्थलों पर बढ़ता संकट

गांव में तबाही के इस मंजर के बीच अब सबसे बड़ी चिंता हेतमापुर के प्रसिद्ध श्री बाबा नारायण दास मंदिर और उसके पास स्थित एक मस्जिद को लेकर है। घाघरा की विनाशकारी धारा इन दोनों धार्मिक स्थलों के बेहद करीब पहुंच गई है, जिससे इन पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। एक स्थानीय निवासी शत्रुघ्न ने कहा, "भले ही मंदिर और मस्जिद के पास नदी की धारा पहुंच गई है, लेकिन गिरेगी नहीं। मंदिर और मस्जिद पर ईश्वर की कृपा है। गांव में बनी मंदिर और मस्जिद काफी पुरानी है।"

प्रशासन का दावा, युद्ध स्तर पर जारी है काम

जिला प्रशासन ने कटान रोकने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। बाढ़ खंड के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं। एसडीएम आकांक्षा गुप्ता भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 20 साल बाद नदी की धारा ने गांव की तरफ रुख किया है। प्रशासन का प्रयास है कि कटान को आबादी और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने से रोका जाए।

एसडीएम गुप्ता ने आश्वासन दिया कि प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिन लोगों के घर नदी कटान में चले गए हैं, उनके रहने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं।" प्रशासन ने ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

बाढ़ पीड़ितों का दर्द

इस आपदा ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। एक बाढ़ पीड़िता सुनीता ने IANS से अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, "जहां मैं पैदा हुई, पले-पढ़े हुए, वही घर आज घाघरा नदी में चला गया है। वहीं, शासन-प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है और कह रहा है कि बांध कटने पर कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाढ़ और शासन की लापरवाही से गांव में 4 लोगों की मौत हुई है। सुनीता ने मांग की कि सरकार उन्हें घर बनाने के लिए जमीन और पैसा मुहैया कराए।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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