बुधवार, 2 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

बाराबंकी: घाघरा नदी का बढ़ा कटान, अपने ही हाथों से घर तोड़ने को मजबूर हुए लोग

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर भले ही घट-बढ़ रहा हो, लेकिन इसके किनारों पर हो रहे तेज़ कटान ने ग्रामीणों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। रामनगर तहसील के तराई इलाकों में…

बाराबंकी: घाघरा नदी का बढ़ा कटान, अपने ही हाथों से घर तोड़ने को मजबूर हुए लोग
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर भले ही घट-बढ़ रहा हो, लेकिन इसके किनारों पर हो रहे तेज़ कटान ने ग्रामीणों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। रामनगर तहसील के तराई इलाकों में नदी की धारा सैकड़ों बीघा उपजाऊ ज़मीन और फसलें निगल चुकी है और अब लोगों के पक्के घरों की तरफ बढ़ रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तबाही से बचने के लिए लोग अपनी वर्षों की मेहनत से बनाए आशियानों को खुद ही तोड़कर ईंटें और ज़रूरी सामान सुरक्षित जगहों पर ले जाने के लिए विवश हैं।

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सूरतगंज ब्लॉक के हेतमापुर से लेकर केदारीपुर तक नदी का कटान सबसे तेज़ है। इन गांवों के निवासियों में डर का माहौल है क्योंकि कटान लगातार उनके घरों के नज़दीक आ रहा है। खेतों के बाद अब मकानों की बारी आने से लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

प्रशासन के प्रयास नाकाफी, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

केदारीपुर के निवासी मोनू कुमार शुक्ला ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, "धान की फसल में काफी पैसा लगाया था लेकिन कटान तेजी से खेत की ओर बढ़ रहा है। परिवार में करीब 12-13 लोग हैं और अब फसल के साथ घर को भी बचाने की चिंता है।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा कटान रोकने के पर्याप्त इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। एक अन्य बुजुर्ग ग्रामीण के अनुसार, कटान रोकने के लिए जो उपाय किए जा रहे हैं, वे नदी की तेज़ धारा के सामने टिक नहीं पा रहे हैं।

वहीं, मीरू शुक्ला नाम की एक और ग्रामीण ने बताया कि वह अपना पक्का घर तोड़कर सामान निकाल रही हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अब कहाँ जाएं। उन्होंने कहा, "प्रशासन की ओर से जो जमीन दी गई है, वह नाले के किनारे है, जहां परिवार को बसाना आसान नहीं है।" बारिश के मौसम में उनके परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है।

क्या कह रहा है प्रशासन?

इस मामले पर अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ जगहों पर कटान की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा, "रामनगर और रामसनेहीघाट तहसील बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं। वर्तमान में जलस्तर खतरे के निशान के आसपास है।" उन्होंने यह भी बताया कि हेतमापुर के पास आबादी के करीब हो रहे कटान को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ज़रूरी निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि 1 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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