ईरान की दोहरी रणनीति: अमेरिका से बातचीत को तैयार, पर सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा
अमेरिका के साथ करीब सात महीने से चल रहे तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। एक तरफ वह बातचीत के दरवाजे खुले रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ किसी भी सैन्य टकराव का पूरी ताकत से जवाब देने के…
अमेरिका के साथ करीब सात महीने से चल रहे तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। एक तरफ वह बातचीत के दरवाजे खुले रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ किसी भी सैन्य टकराव का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए भी तैयार है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने रविवार को कहा कि मौजूदा हालात में ईरान को "लड़ना भी है और बातचीत भी करनी है"।
संसद के सत्र को संबोधित करते हुए गालिबाफ ने कहा कि जब सही समय आएगा, तो ईरान अपनी पूरी सैन्य ताकत से दुश्मन को पीछे धकेलते हुए उसे "भयंकर झटके" देगा। उन्होंने कूटनीति के इस्तेमाल पर भी जोर दिया, लेकिन उसकी अपनी शर्तें हैं। उनके मुताबिक, "जब युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हो जाए और दुश्मन कमजोर स्थिति में पहुंच जाए, तब कूटनीति के जरिए इन सैन्य उपलब्धियों को मजबूत किया जाना चाहिए।"
बातचीत की शर्तें और मध्यस्थता के प्रयास
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश तेहरان और वाशिंगटन के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका के साथ किसी भी औपचारिक बातचीत से पहले तेहरان ने सात शर्तें रखी हैं। हालांकि सभी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन इनमें युद्ध समाप्त करना, ईरान के जब्त फंड को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना प्रमुख मांगें हैं।
गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि "बातचीत को लेकर ईरान की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट, तार्किक और अपरिवर्तनीय है।"
होर्मुज जलडमरूमध्य का अहम मुद्दा
इस तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसकी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक "होर्मुज खुलने की संभावना नहीं है"। इससे पहले भी ईरानी अधिकारी कह चुके हैं कि इस जलमार्ग को खोलने का फैसला अमेरिका के कदमों और तेहरान की शर्तों की पूर्ति पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी हमले की आशंका
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने भी कहा है कि तेहरान अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान को अमेरिकी हमले की आशंका बनी हुई है और उसने अपनी सैन्य योजनाएं इसी संभावना को ध्यान में रखकर तैयार की हैं। रेजाई के अनुसार, यदि अमेरिका के साथ टकराव बढ़ता है तो ईरान के पास क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके हितों को निशाना बनाने की क्षमता है।
इनपुट: IANS



