रविवार, 28 जून 2026 · नई दिल्ली
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जलोदर की आयुर्वेदिक दवा क्या है ?

जलोदर एक बीमारी है जिसमें पेट में अवांछित तरल भर जाता है। आयुर्वेद में इसके इलाज के लिए शिरीष की छाल और एरंड का पंचाग गोमूत्र के साथ उपयोग किए जाते हैं।

जलोदर की आयुर्वेदिक दवा क्या है ?

वर्तमान समय में हमें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. जिनके लिए वैसे तो बाजार में कई तरह की दवाएं उपलब्ध होती हैं. लेकिन वे दवाएं बहुत महंगी होती है. इसके अलावा ऐसा भी देखने को मिला है कि लोगों का भरोसा आयुर्वेदिक इलाज पर बढ़ा है. इसी कारण लोग आयुर्वेदिक औषधियों पर घऱ पर ही इलाज करना बेहतर समझते हैं. लेकिन उनके बीमारियों के इलाज की जानकारी नहीं होती है. इसी कारण उनके मन में बीमारियों के आयुर्वेदिक इलाज से संबंधित कई तरह के सवाल होते हैं. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर पूछा जाता है कि जलोदर की आयुर्वेदिक दवा क्या है ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

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जलोदर

जलोदर क्या होता है-

किसी भी बीमारी के इलाज को जानने से पहले हमारे लिए यह समझना महत्वपूर्ण होता है कि यह बीमारी क्या है. अगर साधारण शब्दों में इसको समझे तो यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हमारे पेट में अवांछित तरल भर जाता है. जिसके कारण हमारा पेट फूल जाता है. अगर इस बीमारी का आरंभ में ही इलाज करें, तो अच्छा होता है, वरऩा यह बीमारी हमारे लिए खतरनाक भी हो सकती है. इसे अंग्रेजी में एसाइटिस भी कहा जाता है.

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जोलदर

जलोदर का इलाज-

अगर जलोदऱ या पेट में पानी भरने की समस्या के आयुर्वेदिक इलाज की बात करें, तो इसके लिए शिरीष के पेड़ की 10 ग्राम छाल को 200 ग्राम पानी में उबाल लें. इसको तब तक उबालते रहें, जब तक कि यह पानी 50 ग्राम ना बच जाएं. इसके बाद इस पानी को छानकर पीं लें. इसको पीने से लिवर में संक्रमण तथा जलोदर की समस्या में आराम मिलता है. इसके साथ ही इससे मूत्र की मात्रा बढ़ती है. जिसके कारण हमारे शरीर के विजातिय तत्व तथा पेट का जहर बाहर निकल जाता है. इसके अलावा दूसरे आयुर्वेदिक उपचार की बात करें, तो इसके लिए 10 ग्राम एरंड का पंचाग ( फूल , पत्ति , फल , तना व जड ) को कूटकर इसे 50 ग्राम गोमूत्र के साथ पकाएं. जब यह 20 ग्राम शेष रह जाए तो इसको मसलकर छान लें. इसको सुबह और शाम जोलधर के रोगी को पिलाएं. यह जलोदऱ के रोगी के लिए रामबाण औषधि है.

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किसी भी बीमारी को समझने में उसके लक्षण बहुत ही मद्दगार होते हैं. अगर जलोदर के लक्षण की बात करें, तो इसमें आमतौर पर व्यक्ति को थकान , जी मचलाना , दम फूलना , भूख ना लगना इत्यादी हो सकते हैं. अगर इस बीमारी के कारण की बात करें, तो इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. जैसे- हेपेटाइटिस , पेट में संक्रमण , लिवर की नशों में खून का थक्का जमना , अग्नाशय में सूजन इत्यादी. जब भी आपको ये लक्षण दिखाई दे या आपको लगे कि आप इस बीमारी से ग्रस्त हैं, तो तुरंत इलाज शुरू करना चाहिएं. इसके साथ ही नजदीकी किसी डॅाक्टर से संपर्क करना चाहिएं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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