शनिवार, 20 जून 2026 · नई दिल्ली
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राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के आरोप: SIT जांच में 50 से ज़्यादा लोगों से पूछताछ

अयोध्या के राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के आरोपों पर बनी SIT ने छह दिन में 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की। समाजवादी पार्टी के पवन पांडे ने करीब 7-7.5 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है। CM योगी ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया, जबकि अखिलेश यादव ने जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की।

राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के आरोप: SIT जांच में 50 से ज़्यादा लोगों से पूछताछ
Prime Minister's Office / Wikimedia (GODL-India)

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावे (दान) के कथित दुरुपयोग के आरोपों ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। इस मामले की पड़ताल के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने छह दिन में 50 से अधिक लोगों से पूछताछ कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच के घेरे में ट्रस्ट के पदाधिकारी, बैंक कर्मचारी और दान गिनने में लगाए गए आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं।

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क्या है पूरा मामला

समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया कि मंदिर में आए चढ़ावे में से करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपए के दान का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। इसी आरोप के बाद मामले ने तूल पकड़ा और शासन स्तर पर जांच के आदेश दिए गए। दान में नकदी के साथ-साथ चांदी, सोना और आभूषण भी शामिल बताए जाते हैं, जिनकी रसीदों और दानकर्ताओं के कथन की जांच की जानी है।

SIT का गठन और सदस्य

एक रिपोर्ट के अनुसार 14 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसे सात दिन के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया। समिति में निम्न अधिकारी शामिल हैं:

  • विजय विश्वास पंत (आईएएस, संभागीय आयुक्त, लखनऊ)
  • किरण एस (आईपीएस, आईजी, रेंज)
  • नील रतन (विशेष सचिव, वित्त)

जांच का छठा दिन 20 जून 2026 (शनिवार) को पूरा हुआ। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों और बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनेशन गिनने का काम आउटसोर्स कर्मचारियों के जरिए कराया जाता था।

तकनीकी पेच और समयसीमा

जांच में एक तकनीकी चुनौती सामने आ रही है — मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परिसर का सीसीटीवी फुटेज 45 दिन बाद स्वतः डिलीट हो जाता है, जिससे फॉरेंसिक टीम के लिए समय सीमा बेहद अहम मानी जा रही है। दानकर्ताओं की रसीदों की भी जांच होनी है ताकि लेन-देन का मिलान किया जा सके।

संभावित कार्रवाई को लेकर दावे

एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि आरोपी/संदिग्ध के रूप में सामने आए टिन्नू यादव के विरुद्ध केस दर्ज किए जाने और बैंक कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी हो सकती है। इन्हीं सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के ट्रस्ट से अलग होने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि यह उल्लेखनीय है कि दो अन्य स्रोतों में इन विशिष्ट नामों या संभावित कार्रवाई का जिक्र नहीं है — वे केवल '50 से अधिक लोगों' की सामान्य पूछताछ का उल्लेख करते हैं। फिलहाल ये सभी व्यक्ति आरोपी/संदिग्ध की श्रेणी में हैं और किसी पर दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप जांच के दायरे को और विस्तृत करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री की रिकॉर्ड तोड़ अयोध्या यात्राओं की भी SIT से जांच कराई जानी चाहिए।

दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया कि जांच में 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाएगा। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर बचाया नहीं जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक CM ने लोगों से '15 और दिन इंतजार' करने की अपील की।

आगे क्या

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। जांच में रसीदों के मिलान, बैंकिंग प्रक्रिया की पड़ताल और दानकर्ताओं के कथन को अहम माना जा रहा है। चूंकि मामला अभी जांच के स्तर पर है, सभी आरोप फिलहाल कथित दावे हैं और किसी पर अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।

NN

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