बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कुल्लू दशहरा उत्सव: भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय समारोह शुरू

हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध कुल्लू घाटी में सात दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का आगाज़ हो गया है। इस उत्सव का केंद्र बिंदु भगवान रघुनाथ की पारंपरिक रथ यात्रा है, जिसमें…

कुल्लू दशहरा उत्सव: भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय समारोह शुरू
(फोटो: IANS)

हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध कुल्लू घाटी में सात दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का आगाज़ हो गया है। इस उत्सव का केंद्र बिंदु भगवान रघुनाथ की पारंपरिक रथ यात्रा है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और सैकड़ों देवी-देवताओं की पालकियां कुल्लू पहुंच रही हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस वर्ष उत्सव के लिए कुल 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है।

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उत्सव की शुरुआत सुल्तानपुर स्थित भगवान रघुनाथ के मंदिर में श्रद्धालुओं और देवी-देवताओं की झांकियों के आगमन के साथ हुई। कुल्लू राजपरिवार की कुलदेवी माता हिडिंबा के कुल्लू पहुंचने के बाद पारंपरिक रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर भगवान की भव्य शोभायात्रा मुख्य मंदिर से ढालपुर मैदान के लिए प्रस्थान करती है, जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण है।

श्रद्धा और सदियों पुरानी परंपरा

यह उत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि गहरी आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का संगम है। दानवेंद्र सिंह ने बताया कि भगवान रघुनाथ कुल्लू घाटी के आराध्य देव हैं और उनके दर्शन के लिए श्रद्धालु 100 से 200 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा करके भी पहुंचते हैं। स्थानीय भाषा में इस कठिन श्रद्धा-यात्रा को 'अठ चाकरी' (या आठ चाकरी) कहा जाता है, जो कुल्लू दशहरा की एक महत्वपूर्ण देव परंपरा है।

ढालपुर मैदान में सात दिवसीय आयोजन

भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ ढालपुर मैदान पहुंचती है, जहाँ अगले सात दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान रघुनाथ खुले दरबार में भक्तों को दर्शन देंगे और प्रतिदिन उनकी विधिवत पूजा-अर्चना होगी। नाग देवता, नारायण और अन्य देवी-देवताओं की उपस्थिति से पूरा मैदान भक्तिमय हो जाता है। 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव में शंख, खड़ताल और नरसिंगों जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज पूरी घाटी में सुनाई देगी।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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