मतदाता सूची से 3 करोड़ 'घुसपैठियों' के नाम हटाने पर अमित शाह से विपक्ष ने मांगे सबूत, शिवसेना ने किया समर्थन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची से हटाए गए 13 करोड़ नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए थे। इस दावे पर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति…
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची से हटाए गए 13 करोड़ नामों में 3 करोड़ घुसपैठिए थे। इस दावे पर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से इन कथित घुसपैठियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं, शिवसेना ने गृह मंत्री के बयान का समर्थन किया है।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर देश में 3 करोड़ घुसपैठिए हैं, तो यह गृह मंत्रालय की सबसे बड़ी विफलता है कि वह घुसपैठ रोकने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा, "अगर भारत में घुसपैठ हुई है, तो यह सबसे बड़ी खामी गृह मंत्रालय की है कि उसने घुसपैठ को रोका क्यों नहीं?" तिवारी ने मांग की कि गृह मंत्री को बताना चाहिए कि ये घुसपैठिए किस देश से आए हैं, उनके नाम क्या हैं और उन्हें यह जानकारी कहाँ से मिली।
विपक्ष ने दी चुनौती, मांगा इस्तीफा
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी गृह मंत्री के बयान पर पलटवार किया। रांची में जेएमएम नेता मनोज पांडे ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, "इन नामों को सार्वजनिक करें। हम आपको ऐसा करने की चुनौती देते हैं। पहचान करें कि घुसपैठिए कौन हैं।"
मनोज पांडे ने आगे कहा कि अगर ये लोग वाकई घुसपैठिए हैं, तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें देश से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर अपनी ही नाकामियों को उजागर करने का आरोप लगाते हुए कहा, "आप अपनी ही नाकामियों को उजागर कर रहे हैं, इसलिए आपको इस्तीफा दे देना चाहिए।"
शिवसेना ने किया गृह मंत्री का बचाव
दूसरी ओर, मुंबई में शिवसेना नेता आनंद दुबे ने अमित शाह के बयान का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के इस बयान से दो समूहों को "झटका" लगा है।
आनंद दुबे के अनुसार, "पहला समूह उन लाखों घुसपैठियों का है जो भारत में अवैध रूप से रहते हैं, वोट डालते हैं और कुछ खास लोगों को सरकार बनाने में मदद करते हैं। दूसरा समूह उन लोगों का है जो इन घुसपैठियों को संरक्षण देते हैं, उनका समर्थन करते हैं और उनके जरिए अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि विपक्ष को संसद में आकर बहस करनी चाहिए, न कि बाहर बयानबाजी।
इनपुट: IANS



