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अहमदाबाद 2008 ब्लास्ट: हाईकोर्ट के फैसले का गुजरात सरकार ने किया स्वागत, जांच टीम और न्यायपालिका का आभार जताया

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक "ऐतिहासिक फैसला" बताया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में निचली अदालत द्व

अहमदाबाद 2008 ब्लास्ट: हाईकोर्ट के फैसले का गुजरात सरकार ने किया स्वागत, जांच टीम और न्यायपालिका का आभार जताया
(फोटो: IANS)

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक "ऐतिहासिक फैसला" बताया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई 38 दोषियों की मौत की सज़ा और 11 की उम्रकैद को बरकरार रखा है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, संघवी ने कहा कि यह फैसला न केवल भारत के लिए, बल्कि दुनिया के सभी शांतिप्रिय देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने 26 जुलाई 2008 को हुए इन धमाकों को याद किया, जिसमें कई निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उपमुख्यमंत्री ने कहा, "सभी पीड़ित परिवारों और गुजरात के नागरिकों की ओर से हम उच्च न्यायालय का आभार व्यक्त करते हैं।"

जांच और न्याय को सलाम

हर्ष संघवी ने इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए जांच टीम की कड़ी मेहनत की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं जांच टीम का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। जांच की वजह से ही सभी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने में सफलता मिली है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है और ऐसी घटनाओं से जुड़े हर एक व्यक्ति को सजा दिलाई जाएगी।

पीड़ितों के लिए मुआवज़े का आदेश

इस फैसले के साथ ही, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। आदेश के मुताबिक, धमाकों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। संघवी ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस आदेश का जल्द से जल्द पालन करेगी।

'जब तक फांसी नहीं, न्याय अधूरा': एक पीड़ित की पीड़ा

इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री और विस्फोट के एक पीड़ित प्रदीप परमार ने कहा कि पीड़ितों को न्याय तो मिला है, लेकिन यह तब तक पूरा नहीं होगा जब तक दोषियों को फांसी नहीं दे दी जाती। IANS से बातचीत में उन्होंने उस भयानक दिन को याद करते हुए बताया कि कैसे लोगों को बचाने के दौरान उनके पास ही एक बम फट गया था, जिससे उनके शरीर में 14 जगह छर्रे लगे थे। उन्होंने कहा कि आज भी उस जगह पर जाने से उन्हें घबराहट होती है।

इनपुट: IANS

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