शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बीसीसीआई और आईसीसी में अरबो रुपयों का समझौता ।

बीसीसीआई का आईसीसी आय को लेकर चल रहे विवाद पर समझौता हो गया। इसके तहत आईसीसी के राजस्व बंटवारा मॉडल के अनुसार भारतीय बोर्ड को 40 करोड़ 50 लाख डॉलर मिलेंगे।

बीसीसीआई और आईसीसी में अरबो रुपयों का समझौता ।
बीसीसीआई का आईसीसी आय को लेकर चल रहे विवाद पर समझौता हो गया। इसके तहत आईसीसी के राजस्व बंटवारा मॉडल के अनुसार भारतीय बोर्ड को 40 करोड़ 50 लाख डॉलर मिलेंगे। आईसीसी के लंदन में वार्षिक सम्मेलन के दौरान इस पर सहमति बनी। इससे पहले थी ज्यादा पैसो की मांग इससे पहले आईसीसी शुरू में बीसीसीआई को 29 करोड़ 30 लाख डॉलर देने पर सहमत हुई थी । लेकिन बीसीसीआई इस पर सहमत नहीं था । लम्बी बातचीत के बाद आईसीसी के चेयरमैन शशांक मनोहर इसमें दस करोड़ डॉलर और बढ़ाने पर सहमत हो गए थे। आखिर में फैसला किया गया कि बीसीसीआई को पूर्व में तय की गई राशि से 11 करोड़ 20 लाख डॉलर अधिक दिए जायँगे। भारत को ज्यादा पैसा आईसीसी के नए राजस्व मॉडल में भी बीसीसीआई को सबसे मुनाफा मिलेगा। दूसरे नंबर पर इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड है, जिसे 13 करोड़ 90 लाख डॉलर मिलेंगे। ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और बांग्लादेश में से प्रत्येक को 12 करोड़ 80 लाख डॉलर जबकि जिम्बाब्वे को 9 करोड़ 40 लाख डॉलर मिलेंगे। द्विपक्षीय मामलो में दखल नहीं आईसीसी ने दो देशो के बीच द्विपक्षीय समझौतों से सम्बन्धित मामलो में हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला किया है। इसे बीसीसीआई के लिए फायदेमंद माना जा रहा है जिसे पीसीबी 2014 में हुए करार का सम्मान नहीं करने के लिए लगातार परेशान करता रहा है। इसे साथ ही बीसीसीआई सब संचालन समूह और विशेषकर आईसीसी रणनीति समूह का भी हिस्सा होगा। आप को बता दे इससे पहले दुबई में आईसीसी की अप्रैल में बोर्ड मीटिंग हुई थी जिसमें प्रस्तावित रेवेन्यू मॉडल के पक्ष में 13 वोट जबकि विरोध में 1 वोट पड़ा था। हार से झल्लाए बीसीसीआई अधिकारी ने चैंपियंस ट्रोफी के बहिष्कार तक की बात कर दी थी। सीओए की सख्ती के बाद 7 मई को हुई बोर्ड की SGM में भारतीय टीम को चैंपियंस ट्रोफी में भेजने के लिए हरी झंडी मिली और आईसीसी में फिर बातचीत का रास्ता चुना गया।
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Neha Jangra

नेहा जांगड़ा News4Social की बिज़नेस संवाददाता हैं। वे व्यापार, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय खबरों को कवर करती हैं, और आर्थिक मुद्दों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुँचाती हैं। सभी लेख देखें →

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