आगा रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा: भाजपा ने बताया 'डूबता जहाज', निर्दलीय विधायक ने कहा 'विचारों का मतभेद'
जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कद्दावर नेता आगा रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे ने एक नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के पतन की शुरुआत बताया है…
जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कद्दावर नेता आगा रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे ने एक नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के पतन की शुरुआत बताया है, वहीं कुछ अन्य राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेद का नतीजा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम पर विभिन्न राजनीतिक दलों से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे को नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक बड़ा झटका करार दिया। उन्होंने कहा, "उनका इस्तीफा नेशनल कॉन्फ्रेंस के डूबते जहाज का संकेत है। यह दिखाता है कि वह जहाज अब डूब चुका है।" ठाकुर के अनुसार, आगा रुहुल्लाह लंबे समय से पार्टी की नीतियों, उसके "झूठ, फरेब और तानाशाही रवैये" से नाखुश थे।
भाजपा ने की नेशनल कॉन्फ्रेंस के बिखराव की भविष्यवाणी
अल्ताफ ठाकुर ने बडगाम उपचुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आगा रुहुल्लाह के चेहरे पर ही बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने दावा किया, "इतने कद्दावर नेता और धार्मिक नेता का नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होना केवल पार्टी को झटका नहीं देगा, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को डुबोने का काम करेगा।" भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर विधायक और कार्यकर्ता भी नाराज हैं और उनकी सुनवाई नहीं हो रही, जिससे तानाशाही का माहौल है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस "दो फाड़ हो जाएगी, टूट जाएगी और बिखर जाएगी।"
इस्तीफे पर एक अलग नज़रिया
दूसरी ओर, शोपियां से निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने इस इस्तीफे को अलग नजरिए से देखा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। कुल्ले के मुताबिक, "जब विचारों में मतभेद होता है तो इंसान यह नहीं देखता कि वह किस पार्टी में था, बल्कि यह देखता है कि अपनी सोच को वह कैसे आगे बढ़ाए।"
उन्होंने संभावना जताई कि शायद आगा रुहुल्लाह को लगा होगा कि वह पार्टी के बंधनों में रहकर लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। शब्बीर कुल्ले ने कहा, "अब वह उन बंधनों को तोड़कर खुली आवाज और खुले विचारों के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और अगर कोई हक की बात करता है तो उसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीडीपी, भाजपा और अन्य दल इसे तमाशे की तरह पेश कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



