अतुल्य भारत की एक ये भी कहानी ,सुन कर आपकी आँखों में भी आ जाएगा पानी
मध्यप्रदेश के कटनी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है ,जिसे सुन कर आपकी भी आँखों से आंसू बह निकलेंगे l आपको बता दें कि हुआ ये कि ,कटनी जिले के ही एक निवासी रामलाल…
मध्यप्रदेश के कटनी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है ,जिसे सुन कर आपकी भी आँखों से आंसू बह निकलेंगे l आपको बता दें कि हुआ ये कि ,कटनी जिले के ही एक निवासी रामलाल सिंह की पत्नी गर्भवती थी l महिला को प्रसव पीड़ा होना शुरू हो गया था l थोड़ी ही देर में महिला की पीड़ा बढ़ती ही जा रही थी l तब रामलाल ने बरही अस्पताल पहुंचाने के लिए सुबह 10 बजे जननी एक्सप्रेस को फोन लगायाl समय चलता रहा, पीड़ा बढ़ती रही, लेकिन कोई जननी एक्सप्रेस नहीं आईl
प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी बीवी
जब कोई जननी एक्सप्रेस नही आयीं और रामलाल की पत्नी की पीड़ा बढती रही तो हारकर उसने अपनी पत्नी को एक ऑटो में जैसे—तैसे बैठाया और अस्पताल की ओर चल पड़ाl हुआ यह कि ,ऑटो अस्पताल से महज 700 मीटर की दूरी पर आकर बंद हो गयाl इतनी पीड़ा में गर्भवती महिला के लिए एक भी कदम चलना बहुत मुश्किल था l रामलाल किसी फिल्म का हीरो भी नहीं था, जो अपनी पत्नी को गोद में उठाकर अस्पताल तक पहुंचाने जैसा फिल्मी काम कर सकताl रामलाल के पास कोई रास्ता नहीं था l इसलिए वह बीवी को वहीँ ऑटो में छोड़कर अस्पताल की ओर दौड़ा l रामलाल अस्पताल जाकर कर्मचारियों के सामने एम्बुलेंस भेजने की विनती करता रहाl पत्नी ऑटो में तड़प रही थीl
हादसा या हत्या
महिला के सब्र का बाँध टूट रहा था l जब थोड़ी और देर रामलाल वापिस नही आया ,महिला ऑटो से पैदल अस्पताल की तरफ निकल पड़ी l कुछ ही दूर चलने पर उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया l लेकिन , लेकिन हुआ यह कि बच्चा पैदा होते ही सड़क पर ऐसे गिरा कि गिरते ही उसकी मौत हो गयी l सड़क पर बिखरा खून ये चीख -चीख कर कह रहा था कि ये कोई हादसा नहीं हत्या है l
कागजों पर हुआ है काम ,असलियत में तस्वीर वही पुरानी
आपको बता दें कि कटनी जिले के बारे में एनएफएचएस—4 की रिपोर्ट बताती है कि प्रसव के दौरान यहां पर लोगों को पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती हैl सरकार ने सुरक्षित प्रसव के लिए मध्यप्रदेश में बहुत काम किया हैl संस्थागत प्रसव पर जोर दिया गया हैl इसका असर हुआ और अब लोग घरों के बजाय अस्पतालों में जाकर प्रसव कराने को प्राथमिकता दे रहे हैंl अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा आशा कार्यकर्ताओं को भी दिया गया है. इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती हैl अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी है, इसे जननी एक्सप्रेस नाम दिया गया हैl सरकार का दावा है कि अब 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रसव अस्पतालों में होने लगे हैंl
कौन है इस मासूम का हत्यारा ?
लेकिन रामलाल और बीना के साथ हुई ये घटना इन सभी दावों को खोखला पता रहा है l कौन है उस नवजात का हत्यारा ?किसने ली उस मासूम की जान?कौन लेगा इसकी ज़िम्मेदारी ? सवाल इतने सारे है ,लेकिन जवाब एक भी नहीं l क्या हमारा प्रशासन और हमारा समाज इतना निष्ठुर हो गया है, कि दर्द से छटपटा रहीं महिला को अस्पताल तक ना ले जा सके l
कब होगा सवेरा ?
देश में होने वाली इन घटनाओं की संख्या बढती जा रही है l कभी आभाव संसाधनों का था लेकिन आज अच्छी नियत का है l अगर प्रशासन की व्यवस्था ठीक होती ,अगर कोई बीना बाई और राम लाल की मदद करता तो शायद एक मासूम को आंखे खोलने से पहले जिंदगी भर के लिए आँखे बंद नही करना पड़ता l
हादसा या हत्या
महिला के सब्र का बाँध टूट रहा था l जब थोड़ी और देर रामलाल वापिस नही आया ,महिला ऑटो से पैदल अस्पताल की तरफ निकल पड़ी l कुछ ही दूर चलने पर उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया l लेकिन , लेकिन हुआ यह कि बच्चा पैदा होते ही सड़क पर ऐसे गिरा कि गिरते ही उसकी मौत हो गयी l सड़क पर बिखरा खून ये चीख -चीख कर कह रहा था कि ये कोई हादसा नहीं हत्या है l
कागजों पर हुआ है काम ,असलियत में तस्वीर वही पुरानी
आपको बता दें कि कटनी जिले के बारे में एनएफएचएस—4 की रिपोर्ट बताती है कि प्रसव के दौरान यहां पर लोगों को पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती हैl सरकार ने सुरक्षित प्रसव के लिए मध्यप्रदेश में बहुत काम किया हैl संस्थागत प्रसव पर जोर दिया गया हैl इसका असर हुआ और अब लोग घरों के बजाय अस्पतालों में जाकर प्रसव कराने को प्राथमिकता दे रहे हैंl अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा आशा कार्यकर्ताओं को भी दिया गया है. इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती हैl अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी है, इसे जननी एक्सप्रेस नाम दिया गया हैl सरकार का दावा है कि अब 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रसव अस्पतालों में होने लगे हैंl
कौन है इस मासूम का हत्यारा ?
लेकिन रामलाल और बीना के साथ हुई ये घटना इन सभी दावों को खोखला पता रहा है l कौन है उस नवजात का हत्यारा ?किसने ली उस मासूम की जान?कौन लेगा इसकी ज़िम्मेदारी ? सवाल इतने सारे है ,लेकिन जवाब एक भी नहीं l क्या हमारा प्रशासन और हमारा समाज इतना निष्ठुर हो गया है, कि दर्द से छटपटा रहीं महिला को अस्पताल तक ना ले जा सके l
कब होगा सवेरा ?
देश में होने वाली इन घटनाओं की संख्या बढती जा रही है l कभी आभाव संसाधनों का था लेकिन आज अच्छी नियत का है l अगर प्रशासन की व्यवस्था ठीक होती ,अगर कोई बीना बाई और राम लाल की मदद करता तो शायद एक मासूम को आंखे खोलने से पहले जिंदगी भर के लिए आँखे बंद नही करना पड़ता l
विषयमध्य प्रदेश



