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भारतीय सेना द्वारा चलाया ऑपरेशन ‘माँ’ का क्या उद्देश्य था?

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कश्मीर घाटी में तैनात 15वीं कोर (चिनार कॉप्स) के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों के निर्देश के अंतर्गत ऑपरेशन माँ को अंजाम दिया गया था। इस ऑपरेशन के तहत सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘मां’ की बदौलत लगभग 50 भटके कश्मीरी युवक को आतंकवाद छोड़ देश की शरण में लाया गया और उनकी ज़िन्दगी को बेहतर बनाया गया। इसके तहत सेना ने लापता युवकों के बारे में जानकारी खोजी और उसके बाद उनके परिवारों से संपर्क किया और उनके बच्चों को उन्हें सोप दिया गया।यह ऑपरेशन सेना के चिनार कोर द्वारा चलाया गया।

यह एक प्रकार का मानवीय ऑपरेशन है जिसके अंतर्गत घरों से लापता हुए युवाओं का पता लगाकर और उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें वापस घर लाना था।भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के लगभग 50 स्थानीय युवाओं का सफाया कर दिया है, जिन्हें पिछले आठ महीनों में किए गए एक लक्षित कार्यक्रम के माध्यम से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने भर्ती किया था।

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ऑपरेशन माँ के पीछे सबसे बड़ा यह उद्देश्य था की पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूहों द्वारा आतंकवाद में लिप्त युवाओं को मुख्यधारा के समाज के तह में वापस लाया जाए। इस कार्यक्रम को घाटी के केवल स्थानीय युवाओं के पुनर्वास में मदद करने के लिए कंडक्ट किया गया, जिन्होंने उग्रवाद का रास्ता चुना। ऑपरेशन “माँ” (माँ) एक शांत मानवीय ऑपरेशन था जिसमें इस साल लगभग 50 कश्मीरी युवक सामान्य जीवन में लौट आए थे, और आतंकी समूहों को छोड़ दिया था।

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