दिल्ली होटल आग- लाइसेंस मालिक नहीं, कर्मचारी के नाम: अकाउंटेंट बोला- सारे दस्तावेज जले; घटना वाले दिन मेट्रो से शहर में घूम रहा था h3>
नई दिल्ली19 मिनट पहले
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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में आग लगने के मामले में जांच के दौरान नए खुलासे हुए हैं। पुलिस को होटल के लाइसेंस, संचालन और फायर सेफ्टी नियमों में संभावित गड़बड़ियों के बारे में जानकारी मिली है।
ये बातें होटल मालिक लवकेश बजाज और अकाउंटेंट जय मिश्रा से पूछताछ के दौरान सामने आईं। दोनों को होटल में आग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 3 जून को हुए हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई थी।
जय मिश्रा ने बताया कि होटल का लाइसेंस बनवाने के लिए बजाज ने उसके दस्तावेज इस्तेमाल किए थे। यही नहीं जिस दिन आग लगी वह घटना वाली जगह आया, थोड़ी देर रुका। फिर मेट्रो से पूरे शहर में इधर-उधर घूमता रहा।
दिल्ली पुलिस ने 3 जून की रात होटल मालिक लवकेश बजाज को अरेस्ट किया था।
पुलिस पूछताछ में 5 खुलासे
- जय मिश्रा करीब 10 साल से बजाज के साथ अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहा था।
- सबसे भरोसेमंद कर्मचारियों में से एक था। हर महीने लगभग 35,000 सैलरी मिलती थी।
- होटल का रोजमर्रा का कामकाज काफी हद तक मिश्रा ही संभालता था।
- होटल में बाकी स्टॉफ की ड्यूटी लगाना भी मिश्रा का काम था।
- यही नहीं होटल में रुकने वाले मेहमानों से जुड़े रिकॉर्ड भी मिश्रा के पास ही होते थे।
कर्मचारी बोला- लाइसेंस वाले दस्तावेज आग में जल गए
मेहमानों के रजिस्टर, पहचान के रिकॉर्ड, लाइसेंसिंग के कागजात और अन्य दस्तावेजों के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने दावा किया कि सभी रिकॉर्ड होटल में रखे गए थे, लेकिन आग में पूरी तरह जल गए।
हालांकि, पुलिस इस दावे की पुष्टि करने की कोशिश कर रही है। जांच करने वाले अधिकारी होटल के कागजी रिकॉर्ड को फिर से तैयार करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों, ऑनलाइन पोर्टलों और संबंधित एजेंसियों से जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि लाइसेंस की मंजूरी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी या मिलीभगत तो नहीं थी।
6 कमरों का लाइसेंस, 25 कमरे चल रहे थे
फ्लरिश स्टे होटल के पास B&B (बेड एंड ब्रेकफास्ट) के तौर पर सिर्फ 6 कमरों का लाइसेंस था। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के मुताबिक, पहली मंजिल पर 3 और दूसरी मंजिल पर 3 कमरे दर्ज थे। होटल सिल्वर कैटेगरी में रजिस्टर्ड था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इमारत में करीब 25 कमरे चलाए जा रहे थे।
आग फैली तो लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, आग सुबह 8:30 बजे लगी। कुछ मिनट में धुआं पूरी इमारत में फैल गया। ऊपरी मंजिलों पर ठहरे लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला। फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय लोगों ने 58 लोगों को बाहर निकाला।
इनमें 35 घायल हैं। इस दौरान 10 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। मैक्स अस्पताल ने बताया, 39 लोगों को लाया गया था, जिसमें 18 की अस्पताल आने से पहले मौत हो चुकी थी। मृतकों में 11 विदेशी और 10 भारतीय हैं। विदेशियों में 9 अफ्रीकी देशों और 2 तुर्कमेनिस्तान के नागरिक हैं।
हादसा होने की 5 बड़ी वजह
- खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन नहीं था। आने-जाने का सिर्फ एक रास्ता था। जगह काफी सकरी थी। बाहरी फायर एस्केप (आपातकालीन निकास) की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी इमारतें ‘चिमनी’ जैसी बन जाती हैं, धुआं-गर्मी कुछ ही सेकंड में ऊपर पहुंच जाती है।
- प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, सेंसर आधारित मुख्य गेट बंद हो गया था। इसकी वजह से लोग बाहर ही नहीं निकल पाए।
- स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण काम नहीं कर रहे थे।
- ग्राउंड फ्लोर पर कई भारी एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे, जिनके लिए कोई फायर-आइसोलेशन सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
बेसमेंट के दरवाजे पर लोहे की ग्रिल लगी थी, जिसे काटकर लोगों को निकाला गया।
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