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राज्यसभा वाला खेला ना हो…इसलिए सुनील पर तेजस्वी का दांव: शिवचंद्र, फारुख पिछड़े, आखिरी समय में राबड़ी के मुंहबोले भाई को टिकट, जानिए पूरा प्लान – Bihar News
राज्यसभा वाला खेला ना हो…इसलिए सुनील पर तेजस्वी का दांव: शिवचंद्र, फारुख पिछड़े, आखिरी समय में राबड़ी के मुंहबोले भाई को टिकट, जानिए पूरा प्लान – Bihar News h3>
विधान परिषद चुनाव के लिए राजद ने सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वह वर्तमान में MLC हैं। तेजस्वी ने उन्हें रिपीट करने का फैसला लिया है। सुनील लालू परिवार के बेहद करीबी हैं। उन्हें राबड़ी देवी का मुंहबोला भाई कहा जाता है। पूर्व सीएम उन्हें हर साल राखी बांधती हैं। सुनील धन बल से भी मजबूत हैं। नीतीश कुमार को पलटू राम कह दिया था, जिसके चलते विधान परिषद की सदस्यता चली गई थी। NEWS4SOCIALकी खास रिपोर्ट में जानिए राजद ने सुनील सिंह को क्यों रिपीट करने फैसला किया है? कौन सी बातें उनके पक्ष में गई हैं। नीतीश से आर-पार लड़ने वाले नेता की छवि आरजेडी से सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारुख की सीटें खाली हो रही हैं। 8 जून तक नामांकन भरा जाना है। वोटिंग की डेट 18 जून है। पार्टी के पास एक उम्मीदवार उतारने लायक संख्या बल है। ऐसे में तेजस्वी ने सुनील कुमार सिंह को टिकट दिया है। लालू परिवार के करीबी हैं सुनील सिंह सुनील सिंह की बड़ी खासियत यह कि वे लालू-राबड़ी परिवार के काफी करीब हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई हैं। हर साल राबड़ी देवी उनको राखी बांधती हैं। कठिन समय में आरजेडी के साथ रहे हैं। आरजेडी में कोषाध्यक्ष भी रहे हैं। सुनील सिंह को उच्च सदन भेज, राजपूत समाज को पॉजिटिव मैसेज देंगे तेजस्वी सुनील सिंह को उच्च सदन के लिए उम्मीदवार बनाकर तेजस्वी यादव ने राजपूत समाज को पॉजिटिव मैसेज देने की कोशिश की है। आरजेडी ने विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजपूत जाति से आने वाले जगदानंद सिंह की जगह अत्यंत पिछड़ी जाति के मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। अब तेजस्वी ने राजपूत जाति से आने वाले सुनील सिंह को फिर से विधान परिषद भेजने के लिए उम्मीदवार बनाया है। तर्कपूर्ण तरीके से बात रखने वाले नेता हैं सुनील सिंह आरजेडी को अभी तर्कसंगत तरीके से बोलने वाला नेता चाहिए। सुनील इस मामले में फिट हैं। वे विधान परिषद में विपक्ष का पक्ष ताकतवर तरीके से रखते हैं। इससे नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को भी ताकत मिलती है। उनकी सीटिंग भी राबड़ी देवी के ठीक बगल में है। वे काफी पढ़े लिखे हैं। एमएससी के बाद पीएचडी की है। कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। मोहम्मद फारुख भी रेस में थे राजद सूत्रों के अनुसार MLC टिकट की रेस में मोहम्मद फारुख का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा था। फारुख लालू परिवार के भरोसेमंद नेता हैं। पर्दे के पीछे संगठन संभालने से लेकर कार्यकर्ताओं को जोड़ने में लगे रहते हैं। शिवहर के नयागांव हाजी टोला के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने तेजस्वी यादव से मांग की थी कि विधान परिषद की सीट पर AIMIM के नेता को मौका दिया जाए। याद दिलाया कि राज्यसभा चुनाव के समय AIMIM ने आरजेडी के उम्मीदवार एडी सिंह को वोट दिया था। तेजस्वी यादव ने आश्वस्त किया था कि आगे मदद करेंगे। ऐसे में उम्मीद थी कि तेजस्वी किसी मुसलमान को MLC का टिकट देंगे ताकि AIMIM की मांग देखते हुए संदेश दे सकें कि मुसलमान नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं। रेस में थे शिवचंद्र राम MLC टिकट की रेस में शिवचंद्र राम भी थे। जेडीयू और बीजेपी ने इस बार किसी दलित नेता को उम्मीदवार नहीं बनाया है। ऐसे में चर्चा थी कि तेजस्वी बड़ा दलित कार्ड खेल सकते हैं। सम्राट सरकार ने राबड़ी आवास दलित मंत्री को दिया है। राबड़ी द्वारा बंगला खाली नहीं करने पर सत्ता पक्ष की ओर से कहा जा रहा है कि दलित मंत्री को घर नहीं दिया जा रहा है। सत्ता पक्ष के इस दांव की काट के लिए उम्मीद थी कि तेजस्वी शिवचंद्र के रूप में एक दलित नेता को उच्च सदन भेज सकते हैं। MLC चुनाव में वोटिंग की पूरी संभावना, जीत के लिए जरूरी हैं 25 वोट बिहार में विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव होना है। द्विवार्षिक चुनाव वाली 9 सीटों का कार्यकाल जून 2032 तक रहेगा। उपचुनाव वाली सीट का कार्यकाल 6 मई 2030 तक रहेगा। ये हैं NDA के प्रत्याशी क्या फिर से खेल कर सकते हैं NDA के नेता? राबड़ी आवास (10 सर्कुलर रोड) खाली कराने को लेकर भाजपा और राजद के नेताओं के बीच टकराव बढ़ा हुआ है। राबड़ी देवी ने पूरी सुरक्षा लौटा दी है। राजनीतिक तनाव भरे इस माहौल में MLC चुनाव हो रहा है।
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