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हनुमानगढ़ में किसानों का महापड़ाव आज, कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे: प्रशासन ने कराई डबल लेयर बेरिकेडिंग, शामियाना लगाया – Hanumangarh News

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हनुमानगढ़ में किसानों का महापड़ाव आज, कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे:  प्रशासन ने कराई डबल लेयर बेरिकेडिंग, शामियाना लगाया – Hanumangarh News

हनुमानगढ़ में किसानों का महापड़ाव आज, कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे: प्रशासन ने कराई डबल लेयर बेरिकेडिंग, शामियाना लगाया – Hanumangarh News


हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट के सामने शनिवार (6 जून) को किसान महापड़ाव डालेंगे। इसको देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास डबल लेयर की बेरिकेडिंग की है। साथ ही कलेक्ट्रेट की ओर आने वाली गलियों को भी ब्लॉक कर दिया गया है। किसानों के बैठने के लिए शामियाना लगाने का काम भी जारी है। यह महापड़ाव संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा गेहूं की सरकारी खरीद सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर बुलाया गया है। किसान संगठन सरकार से पूरी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े माकपा नेता रघुवीर वर्मा ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे से किसान, मजदूर और अन्य लोग कलेक्ट्रेट पर जुटना शुरू हो जाएंगे। वर्मा ने स्पष्ट किया कि किसानों की उपज का एक-एक दाना एमएसपी पर बिकने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान लगातार कर रहे आंदोलन इससे पहले भी जिला मुख्यालय के अलावा पीलीबंगा, गोलूवाला और तलवाड़ा सहित कई स्थानों पर गेहूं खरीद को लेकर किसान आंदोलन कर चुके हैं। पीलीबंगा में तो किसानों ने रेलवे ट्रैक पर भी धरना दिया था। उस समय प्रशासन ने खरीद संबंधी नियमों में कुछ राहत देने और लक्ष्य बढ़ाने का आश्वासन दिया था। गेहूं बेचने से वंचित रहे किसानों के कारण जोर पकड़ रहा आंदोलन हालांकि, सरकार ने शुक्रवार शाम को इस संबंध में लिखित आदेश भी जारी किए हैं, लेकिन किसान इस राहत से संतुष्ट नहीं हैं। इस साल राज्य सरकार ने 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस भी घोषित किया है। ऐसे में एमएसपी पर गेहूं बेचने से वंचित रहने वाले किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसके कारण यह आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। इस बार खरीद शुरू से ही विवादों में रही इस साल गेहूं की सरकारी खरीद शुरू से ही विवादों में रही। पहले एफसीआई के साथ अन्य खरीद एजेंसियों को जोड़ने का विरोध हुआ। इसके बाद ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन के चलते किसान परेशान रहे। इन तकनीकी समस्याओं से निजात मिली तो धानका समाज की ओर से मंडियों में हड़ताल की गई। यह आंदोलन खत्म हुआ तो बारदाना की कमी सामने आई और आखिरकार पूरी गेहूं खरीदने से पहले ही समयसीमा समाप्त हो गई। इस साल गेहूं का उत्पादन बढ़ने के बावजूद खरीद के लक्ष्य नहीं बढ़े। सरकारी आंकड़ों को भी देखें तो जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए कुल 86 हजार 300 किसानों ने पंजीयन करवाया है। अब तक लगभग 60 हजार किसानों से गेहूं की खरीद की गई है। अब सरकार द्वारा लक्ष्य बढ़ाए जाने और शुक्रवार को राहत दिए जाने के बाद करीब 8 हजार किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है। अन्य रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसान किस तरह उपज बेच पाएंगे इसको लेकर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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