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पठानकोट में नई प्रोविजनल वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान: 50 वार्डों से 2 हजार वोट गायब, विपक्ष ने AAP पर लगाए आरोप; अधिकारी बोले-क्लेरिकल मिस्टेक – Pathankot News
पठानकोट में नई प्रोविजनल वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान: 50 वार्डों से 2 हजार वोट गायब, विपक्ष ने AAP पर लगाए आरोप; अधिकारी बोले-क्लेरिकल मिस्टेक – Pathankot News h3>
पठानकोट में नगर निगम चुनाव की रणभेरी बजने से पहले ‘वोटर लिस्ट’ पर जंग छिड़ गई है। नई वार्डबंदी पर रोक लगने के बाद प्रशासन द्वारा जारी प्रोविजनल वोटर लिस्ट ने पार्षदों और भावी उम्मीदवारों के होश उड़ा दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2021 के मुकाबले इस बार कुल वोटरों की संख्या में 2 हजार की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसने सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है। विपक्षियों ने आप पर साधा निशाना
विपक्षी दलों ने सीधे तौर पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया है। जबकि, आम आदमी पार्टी नेताओं का कहना है कि ये लिस्टें कांग्रेस के कार्यकाल में तैयार हुईं थी। अब बाना मतलब हायतौबा मचाई जा रही है। दूसरी तरफ, प्रशासनिक अधिकारी इसे क्लेरिकल मिस्टेक बता रहे हैं और 30 अप्रैल तक दावों/इतराजों को दूर करने का दावा किया जा रहा है। चुनावी समीकरण बिगाड़ेंगे ‘गायब’ हुए वोट
लिस्ट जारी होते ही शहर की सियासत में भूचाल आ गया है। कई वर्तमान पार्षदों ने मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया है कि उनके वार्डों से रणनीति के तहत 150 वोट तक काट दिए गए हैं। दर्जनों वोटरों के नाम बिना जानकारी के एक वार्ड से हटाकर दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिए गए हैं। यहां तक कि जमीनी स्तर पर रहने वाले पुराने वोटरों के नाम सूची से नदारद हैं। ऐसे में ये गायब और इधर-उधर हुए वोय सभी 50 वार्डों का चुनावी समीकरण बिगाड़ देंगे। 2021 के मुकाबले कम हुए 20 हजार वोट
चुनाव विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने चुनावी गणित को पूरी तरह उलझा दिया है। 2021 के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले निगम चुनाव में 50 वार्डों में कुल 1,48,063 वोटर थे। लेकिन, नई प्रोविजनल लिस्ट में यह संख्या घटकर 1,46,209 रह गई है। यानि 2021 के मुकाबले इस बार 1854 वोटर कम हैं। प्रत्याशियों को डर है कि उनके ‘गढ़’ में सेंध लगाने के लिए उनके पक्के वोटरों को ही लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। 12 से ज्यादा वार्डों में 2 से 3 हजार वोटर
नई वार्डबंदी के तहत 12 से ज्यादा वार्ड ऐसे हैं। जिनमें 2 से 3 हजार वोटर हैं। कुछ वार्डों में 2 हजार से भी कम वोटर हैं। कई वार्डों में आबादी और वोटरों की संख्या में भारी अंतर है। वार्डों की आबादी 3 हजार से ज्यादा है, वहां पर वोटर 1300 के पास है। आरोप लगाया गया है कि वार्डों में काट-छांट करने की बजाय एक से दूसरे वार्ड के वोट को इधर-उधर मिला दिया गया है। कई वार्डों में एससी वोट कम हैं, उसे एससी बना दिया गया है। कई जगह पर सामान्य वोट ज्यादा होने के बावजूद एक साथ तीन-तीन वार्ड महिला रिजर्व कर दिया गया है। आबादी बढ़ी पर वोटर हुए कम
विपक्षी दलों का आरोप है कि पिछले पांच साल के दौरान शहर की आबादी बढ़ी है। लेकिन, वोटरों की संख्या कम होना किसी साजिश की ओर इशारा करता है। विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं और मामले को कोर्ट तक ले जाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।
भावी उम्मीदवारों का ये भी कहना है कि वोटर कम होना न केवल लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की साजिश भी हो सकती है। क्या कहते हैं पक्ष-विपक्ष के नेता और अधिकारी ?
कांग्रेस नेता एवं पठानकोट मेयर पन्ना लाल भाटिया का कहना है कि सरकार हार देख कर बौखला गई है। लेकिन, इस बार भी नगर निगम में कांग्रेस का हाऊस बनेगा।
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पार्षद अमित डोगरा का कहना है कि सारे वार्ड का सट्रक्चर खराब कर दिया है। काफी वोट काटे गए हैं। इसके अलावा, वोट इधर से उधर किए हैं। बड़ी परेशानी है।
आप के ब्लाक पठानकोट प्रधान विभूति शर्मा का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा को हर बात पर हायतौबा मचाने की आदत है। ये लिस्ट कांग्रेस की देन है। विभूति शर्मा ने कहा कि उनके खुद के वार्डों में भी यही हाल है। वोट कटे भी हैं और दूसरे वार्डों में मर्ज भी किए गए हैं।
एसडीएम अर्शदीप सिंह ने कहा कि क्लेरिकल मिस्टेक की वजह से वोट इधर-उधर जुड़ जाते हैं। ऑब्जेक्शनों को 30 अप्रैल तक दूर कर वोटर सूची को दुरुस्त किया जाएगा और अंतिम वोटर सूची को 5 मई को प्रकाशित की जाएगी।
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