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अपर्णा यादव का राजनीतिक भविष्य दांव पर: रिश्ता टूटा तो BJP कितना साथ देगी? मुलायम परिवार की बहू होना ही अपर्णा की USP – Uttar Pradesh News

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अपर्णा यादव का राजनीतिक भविष्य दांव पर:  रिश्ता टूटा तो BJP कितना साथ देगी? मुलायम परिवार की बहू होना ही अपर्णा की USP – Uttar Pradesh News

अपर्णा यादव का राजनीतिक भविष्य दांव पर: रिश्ता टूटा तो BJP कितना साथ देगी? मुलायम परिवार की बहू होना ही अपर्णा की USP – Uttar Pradesh News

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बिष्ट और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव के वैवाहिक जीवन में कटुता आ गई है। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर दो पोस्ट कर अपर्णा से तलाक लेने की बात कही।

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राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की बहू और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक की पत्नी होना ही अपर्णा की राजनीति का आधार है, या यूं कहें तो यूएसपी (यूनिक सेलिंग प्र-पोजिशन) है। अब देखना है उनकी पार्टी यानी भाजपा का क्या स्टैंड रहता है? इस प्रकरण से अपर्णा का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर रहेगा।

मुलायम परिवार की बहू अपर्णा यादव और प्रतीक यादव।

अपर्णा यादव ने 2017 में सपा के टिकट से लखनऊ कैंट सीट से भाजपा प्रत्याशी डॉ.रीता बहुगुणा जोशी के सामने चुनाव लड़ा था। लेकिन 2022 के चुनाव से पहले वह 19 जनवरी 2022 को भाजपा में शामिल हो गईं। पार्टी ने तब से समय-समय पर सपा के खिलाफ उनसे चुनाव प्रचार भी करवाया। 2024 में उन्हें राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया।

भाजपा ने सपा के खिलाफ चेहरा बनाया था

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मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु अपर्णा यादव बिष्ट ने विधानसभा चुनाव 2022 की घोषणा के बाद 19 जनवरी 2022 को भाजपा जॉइन की थी। भाजपा के पदाधिकारी बताते हैं उस दौरान तय रणनीति के तहत सपा और कांग्रेस से महिलाओं को तोड़कर भाजपा में शामिल कराया गया। इसमें अपर्णा यादव और ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ की कांग्रेस पोस्टर गर्ल प्रियंका मौर्य भी थीं। अपर्णा यादव सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी पुत्रवधु होने के नाते भाजपा के लिए महिलाओं के बीच मुफीद थीं। पार्टी ने चुनाव के दौरान उन्हें सपा के खिलाफ हथियार बनाकर प्रचार भी कराया।

तस्वीर उस दौरान की है जब अपर्णा यादव ने भाजपा जॉइन की थी।

मुलायम परिवार की बहू होना ही अपर्णा की यूएसपी

राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा मानते हैं कि अपर्णा यादव बिष्ट का मुलायम सिंह यादव परिवार की बहू होना ही एक मात्र यूएसपी (यूनिक सेलिंग प्रपोजिशन) है। अपर्णा खुद उत्तराखंड के ठाकुर परिवार की बेटी हैं, भाजपा में महिला मोर्चा से लेकर मेन बॉडी में कई ठाकुर महिलाएं पदाधिकारी हैं। लेकिन अपर्णा को केवल इसलिए आगे बढ़ाया जा रहा है कि वह सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के भाई प्रदीप यादव की पत्नी हैं। यदि दोनों का रिश्ता नहीं रहता तो इससे अपर्णा को राजनीतिक, सामाजिक और राजनीतिक फ्रंट पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

अपर्णा यादव की पहचान मुलायम परिवार की बहू होना ही है। भाजपा ने सपा को नुकसान पहुंचाने के लिए ही उन्हें पार्टी में शामिल किया था।

तो राजनीतिक भविष्य दांव पर लगेगा

राजनीतिक विश्लेषक अनिल सिंह मानते हैं कि अपर्णा और प्रतीक यादव यदि वैवाहिक संबंध तोड़ते हैं तो इसका सीधा असर अपर्णा के राजनीतिक जीवन पर भी पड़ेगा। यदि उनका यादव परिवार से रिश्ता टूट गया तो भाजपा, सपा के खिलाफ उन्हें चेहरा नहीं बना सकेगी। पार्टी के अंदर भी उनके विरोधी मुद्दा बनाएंगे कि जब अपर्णा का यादव परिवार से कोई संबंध नहीं रहा है तो उन्हें चेहरा क्यों बनाया जाए। वैसे भी भाजपा में अपर्णा का फ्यूचर ज्यादा उज्ज्वल नजर नहीं आता है। क्योंकि वह जननेता नहीं हैं, बतौर नेता उनकी छवि अपीलिंग नहीं हैं।

भाजपा ने अगर अपर्णा-प्रतीक के मुद्दे को सपा के खिलाफ इस्तेमाल किया तो फायदा मिल सकता है।

वहीं, राजनीति के जानकारों का एक वर्ग मानता है कि अपर्णा को महिलाओं की सहानुभूति दिलाने के लिए इसे मुद्दा बनाया जा सकता है। पार्टी रणनीतिक रूप से प्रतीक पर हमलावर हो सकती है कि उन्होंने किस तरह सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी को बदनाम करने वाली पोस्ट की। इसकी आड़ में पार्टी सपा को घेर भी सकती है। यदि ऐसा हुआ तो वह एक बार फिर अपर्णा का सैफई के यादव परिवार के खिलाफ उपयोग कर सकती है।

महापौर पद की दावेदार थीं अपर्णा

अपर्णा यादव ने 2023 में लखनऊ नगर निगम चुनाव में महापौर पद के लिए दावेदारी की थी। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक आरएसएस और भाजपा के कई नेता उनकी पैरवी कर रहे थे। लेकिन लखनऊ महापौर का टिकट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को तय करना था। सूत्रों के मुताबिक अपर्णा यादव राजनाथ सिंह की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। इससे पहले अपर्णा ने लखनऊ की कैंट और सरोजनी नगर से भी 2022 में टिकट की दावेदार की थी। 2022 में ऐसी भी अटकलें लगाई गईं थीं कि भाजपा उन्हें अखिलेश यादव के खिलाफ उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

महिला आयोग में मुश्किल से जॉइन किया

अपर्णा यादव राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष पद मिलने से खुश नहीं थीं। वह कम से कम अध्यक्ष का पद चाहती थीं। उपाध्यक्ष पद मिलने से नाराज अपर्णा ने कुछ दिनों तक जॉइन नहीं किया। उसके बाद भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सीएम योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पद संभाला।

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यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव के परिवार में कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है। प्रतीक ने सोमवार सुबह इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके तलाक के फैसले की जानकारी दी। बताया- वे अपर्णा यादव को तलाक देने जा रहे हैं। अपर्णा पर गंभीर आरोप भी लगाए। पोस्ट में लिखा- ‘उसने मेरे पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया। पढ़ें पूरी खबर

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