‘मैं हिंदू, बांग्लादेश की पार्टियां नहीं चाहतीं हम संसद पहुंचें’: हिंदूवादी नेता का नामांकन रद्द, बोले- देश में हमारे लिए नफरत h3>
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की गोपालगंज सीट से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना चुनाव लड़ा करती थीं। इस सीट से इस बार हिंदूवादी नेता और वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे। उनका नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया। गोबिंद बांग्लादेश जात
.
सवाल: चुनाव आयोग ने आपका नामांकन रद्द करने की क्या वजह बताई है? जवाब: मैंने गोपालगंज-3 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था। यहां निर्दलीय उम्मीदवार को नामांकन करने के लिए कुल वोटर के एक फीसदी के साइन करवाकर चुनाव आयोग के पास जमा करना होता है। मैंने भी साइन करवाकर लिस्ट दी थी। चुनाव आयोग के लोग लिस्ट वेरिफाई करने पहुंचे, तो लोग मुकर गए।
एक रात पहले ही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेताओं ने घर-घर जाकर उन लोगों को धमकी दी थी कि तुम लोगों को गिरफ्तार कर लेंगे। एक हिंदू नेता तापोश हलदार ने नामांकन दाखिल किया था, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दो और हिंदुओं ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया, तो उन्हें भी धमकी दी गई।
सवाल: क्या हिंदू समुदाय से होने की वजह से आपका नामांकन रद्द किया गया है? जवाब: बांग्लादेश में हिंदुओं को हमेशा नजरअंदाज किया गया है। यहां के मुस्लिम नहीं चाहते कि हिंदू चुनकर संसद में आएं। हिंदू समुदाय के कुछ नेता संसद पहुंचे, लेकिन ज्यादातर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, जमात-ए-इस्लामी या अवामी लीग से थे। कोई भी हिंदू नेता निर्दलीय चुनाव लड़कर संसद नहीं पहुंच पाता। वे नहीं चाहते कि हिंदुओं की आवाज वहां पहुंचे। वे चाहते हैं कि एक-दो हिंदू नेता उनके हिसाब से चुनकर आएं।
सवाल: आप निर्दलीय चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं, किसी पार्टी के टिकट पर भी तो लड़ सकते थे? जवाब: मैंने ये बीड़ा उठाया है कि कम से कम एक सीट से ऐसा उम्मीदवार संसद पहुंचे जो हिंदुओं की आवाज उठाए। इसलिए मुझे रोकने के लिए सभी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। मुझे भरोसा है कि वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। मैं चुनाव आयोग में इसके खिलाफ अपील करूंगा, हाईकोर्ट जाऊंगा। मुझे भरोसा है कि मेरी जीत होगी और मैं नामांकन कर पाऊंगा।
सवाल: क्या बांग्लादेश में चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम कर रहा है? जवाब: इलेक्शन कमीशन हमेशा BNP और अवामी लीग के इशारे पर काम करता रहा है। अवामी लीग सत्ता में रहती है, तो उसकी चलती है। अभी BNP की चल रही है। बांग्लादेश में चुनाव आयोग और अदालतें आजाद नहीं रहीं। सत्ता में जो रहता है, उसी के कहने पर काम करते हैं। सत्ता में रही पार्टियां एक-दो सीटों पर दिखाने के लिए हिंदू नेताओं को लड़ने देते हैं, लेकिन ये सिर्फ दिखावा है।
सवाल: चुनाव आयोग पर किसका दबाव है? जवाब: सचिवालय, सेक्रेटरी, पुलिस, इन सभी को BNP और जमात-ए-इस्लामी अपने कब्जे में रखते हैं। संस्थाएं आजाद नहीं हैं। पार्टियां जैसा कहती हैं, वे वैसा ही करती हैं। रिटर्निंग ऑफिसर और जिलाधिकारी बहुत बेबस हैं।
मैंने एसपी से शिकायत की है। उन्होंने कहा है कि मैं इस मामले में जांच करूंगा। कई हिंदुओं ने नामांकन दाखिल किया है। जिन्हें कम वोट मिलने वाले होते हैं, उन्हें चुनाव लड़ने देते हैं। जीतने वाले उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश करते हैं।
सवाल: बांग्लादेश में डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार है, क्या उनकी कोई नहीं सुन रहा? जवाब: डॉ. यूनुस चुनाव करवाकर निकलना चाहते हैं। अब उनसे यहां रहा नहीं जा रहा है। स्टूडेंट लीडर्स डॉ. यूनुस को दबाव में रखते हैं, वे खुलकर काम नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए चाहते हैं कि जिस तरह भी हो, किसी को सत्ता सौंपकर निकल जाएं।
सवाल: पिछले दिनों हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को मारकर जला दिया गया। बांग्लादेश में हिंदुओं की क्या स्थिति है? जवाब: पुलिस ने दीपू चंद्र दास के केस में सख्ती से कार्रवाई की और आरोपियों को जल्द हिरासत में ले लिया। हालांकि देश में हर तरफ हिंदू विरोधी भावना फैल चुकी है। ये शेख हसीना के वक्त से ही चला आ रहा है। काफी तादाद में मस्जिद और मदरसे बनाए गए हैं। इसकी वजह से पूरे बांग्लादेश में कट्टरता फैली है।
कट्टर लोग हिंदुओं को निशाना बनाते हैं, लेकिन सरकार काम कर रही है। आरोपियों को जितना जल्दी गिरफ्तार किया जा रहा है, ऐसा अवामी लीग की सरकार में भी नहीं होता था।
सवाल: चुनाव में हिंदुओं की भागीदारी के लिए क्या किया जाना चाहिए? जवाब: हमने भारत की सरकार और लोगों से गुहार लगाई है कि हिंदुओं के लिए अलग निर्वाचन (सेपरेट इलेक्टोरेट) होना चाहिए। हमने भारत सरकार से कहा था कि वो शेख हसीना से मांग करे कि हिंदुओं के लिए संसद में सीटें रिजर्व हों, अलग से चुनाव प्रकिया हो। हिंदुओं के लिए 40-45 सीटें आरक्षित करने की मांग हमने पहले ही की है। तब हिंदू मजबूती से संसद में चुनकर आएंगे।
सवाल: बांग्लादेश की पार्टियां क्या हिंदुओं की भागीदारी के बारे में नहीं सोचतीं? जवाब: बांग्लादेश में सभी हिंदू अलग चुनाव प्रणाली चाहते हैं। अवामी लीग सत्ता में थी, तो जमात भी ये मांग उठाता था। उन्हें लगता है कि इससे अवामी लीग के वोट कम होंगे। अब जमात का रवैया ऐसा कि हिंदू वोट दे या ना दे, क्या ही फर्क पड़ता है। BNP भी पहले कहती थी कि वो हिंदुओं के लिए 30 सीटें आरक्षित रखेगी, लेकिन उनमें वो ऐसे ही हिंदुओं को रखेगी, जो हिंदुओं के खिलाफ ही काम करते। अब BNP भी ये बात भूल चुकी है। उन्हें भी 8% हिंदुओं के वोट देने या न देने से फर्क नहीं पड़ता।
सवाल: क्या कोई भी पार्टी हिंदू आबादी के साथ नहीं है? जवाब: बांग्लादेश में तो सारी पार्टियां कट्टर विचारधारा वाली हैं। कुछ पार्टियां कहती हैं कि हम सेक्युलर हैं, लेकिन अंदर से सभी एक जैसे कट्टर हैं। जमात-ए-इस्लामी खुलकर धर्म की राजनीति करती है, लेकिन दूसरी पार्टियां अंदर से जमात की तरह हैं।
सवाल: आप वकील हैं, क्या कोर्ट में आपके साथ कभी भेदभाव हुआ है? जवाब: कोर्ट में पढ़े-लिखे लोग आते हैं। वकीलों और जजों के बीच मुझे भेदभाव नहीं झेलना पड़ा। जज भी बहुत संवेदनशील तरीके से बर्ताव करते हैं। शहरों और गांवों में सांप्रदायिक भावना ज्यादा है। पढ़े-लिखे लोगों की आबादी बहुत कम है।
सवाल: अल्पसंख्यकों की बातें सुनी जाएं, इसके लिए आप क्या कर रहे हैं? जवाब: अभी तो सारी दुनिया की मीडिया की नजर बांग्लादेश पर है। मेरा नामांकन रद्द होने की खबर भी पूरी दुनिया में पहुंची है। इससे सरकार पर दबाव बना है। ऐसी छवि बनी है कि सरकार निष्पक्ष चुनाव नहीं करवा पा रही।
सरकार अभी से अलर्ट हो रही है कि अल्पसंख्यकों के साथ गलत न हो। हमारी यूरोपियन यूनियन के साथ भी मीटिंग है। वे भी इस कोशिश में हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी चुनाव में आ सकें, लेकिन देश के मुसलमान इस कोशिश में हैं कि ऐसा न हो पाए।
हम दुनिया के लोगों से कहना चाहते हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय को हाशिए पर धकेला जा रहा है। सारी संस्थाएं और भारत, अमेरिका जैसे देशों को आवाज उठानी चाहिए कि हमारे हितों की रक्षा हो। महिलाओं के हक के लिए सब जैसे आवाज उठाते हैं, वैसे ही बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के लिए भी आवाज उठाएं।
शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद चुनाव बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्रों के आंदोलन के बाद गिर गई। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भारत आ गईं। 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई गई। अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश में 6 महीने में चुनाव कराने का वादा किया। हालांकि बाद में डेडलाइन बढ़ा दी गई और अब 12 फरवरी 2026 को चुनाव होंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी सबसे ताकतवर शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। 30 दिसंबर को खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अब BNP की कमान खालिदा के बेटे तारिक रहमान के पास है। तारिक 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को लंदन से बांग्लादेश लौटे हैं। ढाका एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए BNP के करीब 1 लाख कार्यकर्ता पहुंचे थे।
रहमान ने 29 दिसंबर को ढाका-17 और बोगुरा-6 सीट से नामांकन दाखिल किया है। बोगुरा-6 रहमान की मां खालिदा जिया की सीट रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तारिक रहमान BNP के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।
बांग्लादेश में दो हफ्ते में 4 हिंदुओं की हत्या बांग्लादेश में बीते दो हफ्ते में 4 हिंदुओं की हत्या कर दी गई। ये घटनाएं मैमन सिंह, राजबाड़ी, शरियतपुर और जेसोर में हुई हैं।
- 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। उनके शव को पेड़ पर लटकाकर आग लगा दी गई। दीपू दास पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था।
- 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट की हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, भीड़ ने अमृत पर जबरन वसूली का आरोप लगाया और पीट-पीटकर मार डाला।
- 29 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में एक कपड़ा फैक्ट्री में 42 साल के बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये घटना भालुका की सुलताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री में हुई।
- 31 दिसंबर की रात 9:30 बजे 50 साल के कारोबारी खोकन चंद्र दास पर हमला किया गया। वे शरियतपुर जिले के दामुद्या में दुकान बंद करके घर लौट रहे थे। बदमाशों ने उनका ऑटो रोककर बुरी तरह पीटा, फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इलाज के दौरान खोकन चंद्र की मौत हो गई।
- 5 जनवरी को जेसोर जिले के मणिरामपुर में 38 साल के राणा प्रताप बैरागी को गोली मार दी गई। वे आइस प्लांट चलाते थे। हत्या वाली जगह से सात खोखे मिले हैं।
………………………………
बांग्लादेश से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
बेटे को मारकर जलाया, फिर परिवार को घर छोड़ने की धमकी
बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 80 किलोमीटर दूर, खेतों के बीच दो कच्चे घर बने हैं। इन्हीं में से एक 25 साल के दीपू चंद्र दास का है। 18 दिसंबर की रात दीपू को भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसकी डेडबॉडी जला दी गई। परिवार को सरकार से मदद तो नहीं मिली, बल्कि गांव वाले घर छोड़कर जाने के लिए धमकी दे रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…





