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जिला खनिज कार्यालय और ऑडिटोरियम के टेंडर में गड़बड़ी: सिंगरौली में 7.42 करोड़ के भवन निर्माण में सिर्फ एक कंपनी को मिला काम – Singrauli News

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जिला खनिज कार्यालय और ऑडिटोरियम के टेंडर में गड़बड़ी:  सिंगरौली में 7.42 करोड़ के भवन निर्माण में सिर्फ एक कंपनी को मिला काम – Singrauli News

जिला खनिज कार्यालय और ऑडिटोरियम के टेंडर में गड़बड़ी: सिंगरौली में 7.42 करोड़ के भवन निर्माण में सिर्फ एक कंपनी को मिला काम – Singrauli News

सिंगरौली में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) कार्यालय और ऑडिटोरियम के 7 करोड़ 42 लाख रुपए के निर्माण टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। अप्रैल 2024 में आमंत्रित इस टेंडर में सिर्फ एक ही संविदाकार, मेसर्स जीजी इंटरप्राइजेज, इंदौर ने प्रस्ताव दिया था।

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जानकारी के अनुसार, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री मनोज बाथम ने इस सिंगल टेंडर को स्वीकृत कर दिया था, जबकि इसकी दर एसओआर से 3.97 प्रतिशत अधिक थी। बाद में बोर्ड ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक, एक अन्य ठेकेदार की निविदा को तकनीकी कमी बताकर निरस्त कर दिया गया था।

सिंगरौली विकास प्राधिकरण ने नहीं दी जानकारी

आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगने पर सिंगरौली विकास प्राधिकरण (सीडा) ने इसे देने से इनकार कर दिया। इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर संदेह गहरा गया है। यह भी चर्चा है कि टेंडर का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, ताकि किसी पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जा सके।

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यह पूरा मामला अब नए कलेक्टर की जांच का विषय बन सकता है। पूर्व प्रभारी ईई मनोज बाथम ने बताया कि उनका तबादला हो गया है और वे इस मामले पर फिलहाल कुछ नहीं कह सकते। हालांकि, विभागीय सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में कई सवालिया निशान हैं।

कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया

कांग्रेस शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि यह भाजपा सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार का उदाहरण है, जहां सिंगल टेंडर के बावजूद कार्य आदेश जारी कर पसंदीदा ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया।

वहीं, सिंगरौली विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री अरविंद मंडराई ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में सिंगल टेंडर निकाला गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह टेंडर उनके कार्यकाल में नहीं हुआ है और फाइल देखकर ही वे स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि वे फिलहाल भोपाल में हैं।

करोड़ों रुपए के इस प्रकरण ने जिले में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच के परिणामों पर टिकी हैं।

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