शहीद-ए-आजम भगत सिंह-सुखदेव की नौजवान सभा का 100 वां साल: शहीद करतार सिंह के गांव में समारोह, शहीदों के परिजन शामिल – Ludhiana News h3>
नौजवान सभा के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में शामिल लोग।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव व अन्य शहीदों ने अंग्रेजों की खिलाफत के लिए नव युवकों को एकजुट करने के लिए बनाई गई नौ जवान सभा का 100 वां साल चल रहा है। डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया ने शहीद करतार सिंह सराभा के गांव सराभा में यह शताब्दी वर्ष मनाया। श
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नौजवान सभा के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में फेडरेशन ने इस दल से जुड़े शहीदों के परिजनों व वारिसों को बुलाया। वहीं डीवाईएफआई ने भी अपना 46 वां स्थापना दिवस मनाया है। डीवाईएफआई की स्थापना तीन नवंबर 1980 को शहीद करतार सिंह सराभा के घर में हुई।
संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि वो नौजवान सभा के शताब्दी वर्ष में अलग-अलग जगह पर कार्यक्रम किए जाएंगे ताकि लोगों शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव व अन्य की सोच से अवगत कराया जा सके। उन्होंने कहा क इन कार्यक्रमों में शहीदों के वारिसों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इस मोके पर संस्था के चेयरमैन सुखविंदर सिंह ने सभी का स्वागत किया।
क्यों बनी थी नौजवान सभा
नौजवान सभा का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं में देशभक्ति, समाज सुधार और अंग्रेजों के शासन के खिलाफ जागरूक करना था। शहीद भगत सिंह इस संस्था के संस्थापक थे। नौजवान सभा को आगे बढ़ाने में सुखदेव थापर व अन्य शहीदों ने अहम भूमिका निभाई।
ये थे नौजवान सभा के संस्थापक सदस्य
- भगत सिंह
- भगवती चरण वोहरा
- सुखदेव थापर
- यशपाल
- झब्बर मल
- गुरबख्श सिंह ढिल्लों
नौजवान सभा ने इस तरह किया लोगों को जागरूक
नौजवान सभा के सदस्य अलग अलग जगहों पर सभाएं, भाषणों और पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से देशभक्ति का प्रचार करे थे। नौजवानों को संगठित करना और क्रांतिकारी आंदोलनों में शामिल किया। 1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद हुए आंदोलन में इस संगठन की भूमिका अहम रही।
ब्रिटिश सरकार की 1930 में लगाया था प्रतिबंध
ब्रिटिश सरकार ने इसे विद्रोही संगठन घोषित कर दिया।1930 में नौजवान सभा पर प्रतिबंध लगाया, क्योंकि यह युवाओं को अंग्रेजी शासन के खिलाफ भड़काने का काम कर रही थी। प्रतिबंध के बाजवूद अंदर खाते इस संगठन को नव युवक चलाते रहे।
शहीदों को याद करना एक अच्छी परंपरा
कार्यक्रम में शामिल शहीद ए आजम सुखदेव थापर मैमोरियल ट्रस्ट के चेयरमैन अशोक थापर ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से शहीदों की यादें चिर काल के लिए बनी रहती हैं। उन्होंने बताया कि समागम में शामिल युवाओं को नौजवान सभा के कार्यों से अवगत कराया गया जिनके बारे में उन्हें पता नही नहीं था। शहीदों काे याद करना अच्छी परंपरा है।
