75% ग्राहकों को पहले कीमत कम दिखी, खरीदते वक्त बढ़ी: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स किन 5 डार्क पैटर्न से ग्राहकों को गुमराह करते हैं h3>
इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रही श्रेया को एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का विज्ञापन दिखा। जिसमें एक ड्रेस की कीमत 750 रुपए थी। श्रेया ने फौरन उसे क्लिक किया, लेकिन खरीदते वक्त उसी ड्रेस की कीमत 1400 रुपए हो गई। श्रेया ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के डार्क पैटर्न का इकलौत
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कम्युनिटी प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स ने 77,000 हजार लोगों पर सर्वे करके ई-कॉमर्स मार्केट प्लेस के ऐसे 5 डार्क पैटर्न्स बताए हैं, जो ग्राहकों को गुमराह करते हैं…
1. Drip Pricing: कम कीमत दिखाकर ग्राहकों को लुभाना
ड्रिप प्राइसिंग’ यानी जब आप प्रोडक्ट देखते हैं तब उसकी कीमत कम होती है, लेकिन पेमेंट पेज पर पहुंचते ही टैक्स, सर्विस फीस, प्लेटफॉर्म फीस, हैंडलिंग चार्ज और कैश ऑन डिलीवरी (COD) चार्ज जोड़ देते हैं। इससे प्रोडक्ट की कीमत काफी बढ़ जाती है। लोकल सर्कल्स के सर्वे में 75% यानी हर 4 में से 4 ग्राहक इस डार्क पैटर्न का शिकार बने।
उदाहरण: पहले प्रोडक्ट सिर्फ ₹1000 दिखाया गया, लेकिन चेकआउट पर अचानक ₹80 पेमेंट चार्ज और ₹50 प्लेटफॉर्म फीस जुड़ गई। अब प्रोडक्ट कुल 1130 रुपए का हो गया।
पेमेंट हैंडलिंग के लिए 5 रुपए चेक आउट के समय जुड़े।
2. Bait & Switch: चारा डालकर ग्राहक को फंसा लेना
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म कई बार किसी प्रोडक्ट की कीमत या फास्ट डिलीवरी को बहुत आकर्षक तरीके से दिखाते हैं, ताकि ग्राहक ऐप या वेबसाइट पर आए। यूजर जैसे ही वेबसाइट पर लॉग-इन करता है, कीमत पहले से ज्यादा निकलती है। सर्वे में शामिल 48% लोगों को इस डार्क पैटर्न का शिकार हुए।
उदाहरण: सोशल मीडिया पर कोई प्रोडक्ट ₹500 में दिखाया गया, लेकिन लॉग-इन करने के बाद वही प्रोडक्ट ₹700 में मिल रहा है।
यूजर को आईफोन की कीमत 59,990 रूपए बताई गई लेकिन क्लिक करने पर वह बढ़कर 67,900 रुपए हो गई।
3. Privacy Zuckering: बिना इजाजत डेटा का इस्तेमाल करना
प्राइवेसी जकरिंग यानी कस्टमर की जानकारी का गलत इस्तेमाल करना और बिना इजाजत उसे मैसेज पर नए-नए ऑफर भेजना। लोकल सर्कल्स के सर्वे में 44% लोग इससे परेशान हैं। प्राइवेसी जकरिंग के कई तरीके हैं…
- यूजर अगर कार्ट में प्रोडक्ट छोड़ देता है, तो प्लेटफॉर्म बिना इजाजत वॉट्सऐप या SMS पर मैसेज भेजकर ऑर्डर पूरा करने का दबाव बनाना।
- यूजर को बिना बताए उसकी जानकारी जैसे- सर्च हिस्ट्री, लोकेशन का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज को पुश करने के लिए करना।
- कस्टमर वेबसाइट में जैसे ही लॉगिन करे उससे एक फॉर्म में पर्सनल जानकारी भरवा लेना। जैसे कस्टमर की व्हीकल डीटेल्स लेना। बाद में उसे इंश्योरेंस पॉलिसी के ऑफर भेजना।
यूजर ने प्रोडक्ट की वेबसाइट विजिट की, जिसके बाद उसे प्रोडक्ट के बारे में लगातार मैसेज आने लगे।
4. Forced Action: ग्राहक को मजबूर करना
फोर्स्ड एक्शन यानी कस्टमर को उनकी सहमति के बिना किसी एक्शन लेने के लिए मजबूर करना। जैसे-
- यूजर को अगले स्टेप पर जाने के लिए गैर-जरूरी पर्सनल डेटा (जैसे फोन नंबर, लोकेशन) देना पड़ता है, भले ही यह प्रोडक्ट खरीदने के लिए जरूरी न हो।
- यूजर अगर पेमेंट स्टेज पर ऑर्डर कैंसिल करता है, तो भी प्लेटफॉर्म कैश ऑन डिलीवरी (COD) या पे लेटर मोड में ऑर्डर प्रोसेस कर देता है।
- ऑर्डर कैंसिल करने के लिए लंबी और जटिल प्रोसेस होती है। जिससे यूजर पेमेंट पेज पर ही ऑर्डर छोड़ देता है, लेकिन प्लेटफॉर्म बिना पूछे प्रोडक्ट की डिलीवरी कर देता है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर 29% यूजर्स को अकसर इसका सामना करना पड़ता है।
यूजर ने पेमेंट करने से ठीक पहले ऑर्डर कैंसिल कर दिया लेकिन फिर भी ऑर्डर प्लेस हो जाता है।
5. Basket Sneaking: ग्राहक के कार्ट में खुद कुछ जोड़ देना
कई ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स कस्टमर की सहमति के बिना उसके कार्ट में कोई प्रोडक्ट, सर्विस या डोनेशन ऐड कर देते हैं, जिन्हें यूजर को मैनुअली हटाना पड़ता है। जैसे-
- खरीदारी के दौरान इंस्टॉलेशन सर्विस, वारंटी, या डोनेशन जैसे आइटम्स अपने आप कार्ट में जुड़ जाते हैं।
- इन एक्स्ट्रा आइटम्स को हटाने के लिए ऐसा ऑप्शन रखा जाता है, जो कस्टमर को आसानी से समझ न आए।
- चेकआउट पेज पर एक्स्ट्रा चार्जेस इतने बारीक शब्दों में दिखाए जाते हैं, जिसपर यूजर का ध्यान नहीं जाता और वे अनजाने में पेमेंट कर देते हैं। जैसे- फ्रिज खरीदते समय ₹500 की इंस्टॉलेशन सर्विस अपने आप कार्ट में जुड़ जाती है, जिसे यूजर को मैनुअली हटाना पड़ता है।
चेक आउट पर इंस्टॉलेशन के लिए कंपल्सरी एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ दिए।
लोकल सर्कल्स की रिपोर्ट के मुताबिक Amazon, Flipkart, Tata Neu, JioMart और Myntra पर डार्क पैटर्न पाए गए। हालांकि Meesho पर ऐसा देखने को नहीं मिला।
ई-कॉमर्स साइट्स प्रोडक्ट बेचने के लिए कस्टमर में फोमो पैदा करती हैं
ई-कॉमर्स वाली कई साइटें ‘लास्ट पीस बचा है’, ‘सिर्फ 2 मिनट में ऑफर खत्म’ जैसी लाइनों से कस्टमर में फोमो (FOMO) यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट पैदा करती हैं। कुछ ई-कॉमर्स साइट पर तो ‘डिफॉल्ट ऑप्शन’ में ऐसे प्रोडक्ट या सर्विस जुड़े होते हैं, जिनकी जरूरत ही नहीं होती।
8 अक्टूबर 2025 को कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर प्रहलाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि ई-कॉमर्स साइटों पर कैश ऑन डिलीवरी पर एक्स्ट्रा चार्ज की शिकायतें मिली हैं। जबकि इसके खिलाफ सरकार ने सख्त नियम बना रखे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट पर ये भी कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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