प्रयागराज के फतेहपुर में फरसे से 3 लोगों पर हमला: बुजुर्ग की मौत, दो घायल; गांव में तनाव – Prayagraj (Allahabad) News h3>
अजय कुमार | प्रयागराज2 मिनट पहले
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फतेहपुर जिले के अजरौली पल्लावा गांव में 26 अगस्त की शाम एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई। गांव के ही श्याम पांडे ने फरसे से हमला कर तीन लोगों को लहूलुहान कर दिया। इस हमले में 65 वर्षीय केशपाल पटेल की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
जानकारी के मुताबिक, केशपाल पटेल अपने बेटे योगेंद्र सिंह के साथ घर के बरामदे में बैठे थे। तभी पड़ोसी श्याम पांडे फरसा लेकर आया और उनके सिर व गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। इसके बाद उसने वीरभान पटेल और 70 वर्षीय रिटायर्ड सिपाही रामलखन पटेल को भी नहीं छोड़ा।
आरोपी बोला- मैं परशुराम का अवतार हमले के बाद श्याम पांडे सीधे गांव के मंदिर में पहुंचा और वहां उसने खुद स्वीकार किया कि उसने तीन पटेलों पर हमला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर था और खुद को परशुराम का अवतार बताता था।
इलाज और FIR पर सवाल पीड़ित परिवार का आरोप है कि घायलों को स्थानीय अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला और एफआईआर में भी धारदार हथियार से हमले का जिक्र नहीं किया गया। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही इलाज शुरू हुआ। प्रयागराज के अपना मोर्चा अध्यक्ष ने पुलिस पर जांच में पक्षपात का आरोप लगाया।
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ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से पटेल समाज के खिलाफ भड़काऊ बातें करता था। उनका आरोप है कि पुलिस मामले को दबाने और जातीय उन्माद की वजह छिपाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती और नाकेबंदी है।
विपक्ष के नेताओं को रोका गया घटना के बाद गांव का माहौल बेहद तनावपूर्ण है। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, पूर्व सांसद बालकुमार पटेल और डॉ. पल्लवी पटेल को गांव जाने से रोका गया। नरेश उत्तम को तो पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की नाराजगी और बढ़ गई।
पीड़ित परिवार की मांग परिवार ने एक करोड़ रुपए मुआवजे, मजिस्ट्रेट जांच और निष्पक्ष विवेचना की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच की जिम्मेदारी उसी बिरादरी के सीओ को दी गई है, जिससे भरोसा और आक्रोश दोनों बढ़े हैं।
तनावपूर्ण शांति अपना मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस की सख्ती और नाकेबंदी ने जातीय संघर्ष की आशंका और बढ़ा दी है। वहीं, सत्ता पक्ष की चुप्पी से पीड़ित परिवार खुद को और अकेला महसूस कर रहा है। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति है और पुलिस बल तैनात है।
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अजय कुमार | प्रयागराज2 मिनट पहले
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फतेहपुर जिले के अजरौली पल्लावा गांव में 26 अगस्त की शाम एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई। गांव के ही श्याम पांडे ने फरसे से हमला कर तीन लोगों को लहूलुहान कर दिया। इस हमले में 65 वर्षीय केशपाल पटेल की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
जानकारी के मुताबिक, केशपाल पटेल अपने बेटे योगेंद्र सिंह के साथ घर के बरामदे में बैठे थे। तभी पड़ोसी श्याम पांडे फरसा लेकर आया और उनके सिर व गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। इसके बाद उसने वीरभान पटेल और 70 वर्षीय रिटायर्ड सिपाही रामलखन पटेल को भी नहीं छोड़ा।
आरोपी बोला- मैं परशुराम का अवतार हमले के बाद श्याम पांडे सीधे गांव के मंदिर में पहुंचा और वहां उसने खुद स्वीकार किया कि उसने तीन पटेलों पर हमला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर था और खुद को परशुराम का अवतार बताता था।
इलाज और FIR पर सवाल पीड़ित परिवार का आरोप है कि घायलों को स्थानीय अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला और एफआईआर में भी धारदार हथियार से हमले का जिक्र नहीं किया गया। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही इलाज शुरू हुआ। प्रयागराज के अपना मोर्चा अध्यक्ष ने पुलिस पर जांच में पक्षपात का आरोप लगाया।
ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से पटेल समाज के खिलाफ भड़काऊ बातें करता था। उनका आरोप है कि पुलिस मामले को दबाने और जातीय उन्माद की वजह छिपाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती और नाकेबंदी है।
विपक्ष के नेताओं को रोका गया घटना के बाद गांव का माहौल बेहद तनावपूर्ण है। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, पूर्व सांसद बालकुमार पटेल और डॉ. पल्लवी पटेल को गांव जाने से रोका गया। नरेश उत्तम को तो पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की नाराजगी और बढ़ गई।
पीड़ित परिवार की मांग परिवार ने एक करोड़ रुपए मुआवजे, मजिस्ट्रेट जांच और निष्पक्ष विवेचना की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच की जिम्मेदारी उसी बिरादरी के सीओ को दी गई है, जिससे भरोसा और आक्रोश दोनों बढ़े हैं।
तनावपूर्ण शांति अपना मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस की सख्ती और नाकेबंदी ने जातीय संघर्ष की आशंका और बढ़ा दी है। वहीं, सत्ता पक्ष की चुप्पी से पीड़ित परिवार खुद को और अकेला महसूस कर रहा है। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति है और पुलिस बल तैनात है।



