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UK को कपड़ा बेचकर अमेरिकी घाटे की भरपाई करेगा भारत: FTA से भारत को ब्रिटेन के ₹2.02 लाख करोड़ के मार्केट में मौका मिलेगा

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UK को कपड़ा बेचकर अमेरिकी घाटे की भरपाई करेगा भारत:  FTA से भारत को ब्रिटेन के ₹2.02 लाख करोड़ के मार्केट में मौका मिलेगा

UK को कपड़ा बेचकर अमेरिकी घाटे की भरपाई करेगा भारत: FTA से भारत को ब्रिटेन के ₹2.02 लाख करोड़ के मार्केट में मौका मिलेगा

नई दिल्ली2 घंटे पहले

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24 जुलाई को भारत-यूके ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया था।

अमेरिका ने भारतीय टेक्सटाइल सामान पर 50% टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू है। इससे भारत के टेक्सटाइल और कपड़ा एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। हालांकि, एक अच्छी खबर यह है कि भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के कारण ब्रिटेन को एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी से इस नुकसान की भरपाई हो सकती है। यह बात केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ (EU) के साथ चल रही FTA की बातचीत भी इंडियन टेक्सटाइल ट्रेड के लिए नए रास्ते खोल सकती है। भारत-यूके FTA को खासतौर पर रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) और होम टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। यह भारत को ब्रिटेन के करीब 23 बिलियन डॉलर यानी 2.02 लाख करोड़ रुपए के इंपोर्ट मार्केट में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के बराबर मौका देगा।

अमेरिकी टैरिफ से कितना नुकसान?

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केयरएज रेटिंग्स के असिस्टेंट डायरेक्टर अक्षय मोरबिया के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 2026 में 9-10% की कमी आ सकती है। इससे भारतीय RMG और होम टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के मुनाफे में 3% से 5% की गिरावट आ सकती है।

हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स अपने अमेरिकी ग्राहकों के साथ कीमतों पर कितनी अच्छी बातचीत कर पाते हैं, ताकि एक्सपोर्ट की मात्रा बरकरार रहे।

सरकार का समर्थन और नई संभावनाएं

केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर क्रुणाल मोदी ने बताया कि भारत सरकार ने कॉटन पर 10% इंपोर्ट ड्यूटी को 31 दिसंबर 2025 तक हटा दिया है। इसके अलावा सरकार 40 देशों में अपने स्पेशल आउटरीच प्रोग्राम के जरिए एक्सपोर्ट मार्केट्स को बढ़ाने, एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स और इंटरेस्ट सब्सिडी जैसे कदमों के जरिए टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के कॉम्पिटिशन और मुनाफे को बढ़ाने में मदद कर रही है।

मोदी ने यह भी कहा कि RMG और होम टेक्सटाइल में होने वाले नुकसान की भरपाई कॉटन यार्न और फैब्रिक के एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी से हो सकती है। क्योंकि बांग्लादेश जैसे कॉम्पिटिटर्स देशों के पास इन प्रोडक्ट्स में बैकवर्ड इंटीग्रेशन (प्रोडक्शन की पूरी चैन) की कमी है। भारत-यूके FTA और EU के साथ संभावित ट्रेड एग्रीमेंट्स के फायदे इस दिशा में अहम होंगे।

अमेरिका है सबसे बड़ा बाजार

पिछले चार सालों (2021-2024) में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और कपड़ा एक्सपोर्ट मार्केट रहा है, जो टोटल एक्सपोर्ट का 28-29% हिस्सा है। भारत मुख्य रूप से कॉटन-बेस्ड होम टेक्सटाइल और कपड़े अमेरिका को एक्सपोर्ट करता है, जो 2024 में इसके टोटल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का 90% था। अमेरिका के अलावा बांग्लादेश (7%), यूके (6%), UAE (5%) और जर्मनी (4%) भारत के अन्य प्रमुख एक्सपोर्ट मार्केट्स हैं।

कॉमर्स मिनिस्ट्री का बयान

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने 28 अगस्त को कहा कि अमेरिकी टैरिफ का टेक्सटाइल, केमिकल्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों पर शॉर्ट-टर्म असर होगा। वहीं लंबे समय में भारत के कुल व्यापार और GDP पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।

क्या है आगे की राह?

भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिकी टैरिफ एक चुनौती जरूर है। लेकिन यूके और EU जैसे नए बाजारों के साथ-साथ सरकार के समर्थन से इस नुकसान को कम करने की पूरी संभावना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स अगर कीमतों और क्वालिटी पर ध्यान दें, तो वे ग्लोबल मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सकते हैं।

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