उज्जैन खेल इतिहास: पहली बार 3 दिन उत्सव, उज्जैन में मलखंभ अच्युतानंद महाराज ने शुरू किया – Ujjain News h3>
मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन उपलक्ष्य में बनाया जाने वाले खेल दिवस मप्र में इस साल पहली बार 3 दिन तक मनाया जाएगा। पहले दिन नानाखेड़ा स्थित स्टेडियम में खेल प्रतियोगिताओं से शुरुआत हुई। शनिवार काे कार्यशाला तो 31 अगस्त रविवार काे साइकिल रैली के साथ उत्सव
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1974 में विक्रम अवार्ड से सम्मानित हुए पूर्व मलखंभ खिलाड़ी किशोरीशरण श्रीवास्तव बताते हैं कि उज्जैन में खेल की शुरुआत 150 साल पहले श्री अच्युतानंद गुरु अखाड़ा रामघाट से हुई। यहां कुश्ती, लट्ठबाजी और योग होता था। बाद में सिंधिया स्टेट गुरु अच्युतानंदजी के सान्निध्य में ही 108 साल पहले 1917 में शहर के बीच भागसीपुरा में व्यायामशाला की नींव रखी गई।
यहां पहली बार पुरुषों के साथ महिलाओं को खेल में शामिल किया गया। उस समय प्रचलन में चलने वाले सभी खेलों की यहां ट्रेनिंग दी जाती। व्यायाम के साथ कुश्ती व मलखंभ सबसे ज्यादा खेला जाता। गुरु अखाड़ा और व्यायामशाला से ही उज्जैन में खिलाड़ियों की फौज खड़ी हुई। मलखंभ में तो उज्जैन को ऐसी महारथ मिली कि शुरुआत 4 साल तक लगातार शहर के ही खिलाड़ियों ने विक्रम अवार्ड जीते।
खेल विशेषज्ञ आज देंगे विशेष टिप्स जिला खेल अधिकारी ओपी हरोड़ ने बताया खेल दिवस पर पहले दिन शुक्रवार को नानाखेड़ा स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खिलाड़ियों के साथ रस्सा कस्सी की। टेबल टेनिस व हॉकी प्रतियोगिता हुई। वहीं द्रोणाचार्य अवार्डी योगेश मालवीय को सम्मानित किया गया। हरोड़ ने बताया शनिवार को स्टेडियम में ही खिलाड़ियों को खेल के टिप्स दिए जाएंगे। वहीं रविवार को साइकिल रैली के साथ खेल प्रतियोगिता का समापन हो जाएगा।
2024 में नेशनल गेम्स में मलखंभ ने मप्र का बढ़ाया मान वर्तमान मलखंभ कोच योगेश मालवीय ने बताया साल 2006 में मलखंभ को राष्ट्रीय खेल में शामिल किया गया। 2012 में पूर्ण राजकीय खेल में शामिल करते हुए मप्र के 13 जिलों में इसके कोच रखकर ट्रेनिंग शुरू कराई। मालवीय ने बताया हाल ही में दिसंबर 2024 में उत्तराखंड में हुए नेशनल गेम्स में मलखंभ ने ही मप्र का मान बढ़ाया। प्रदेश को मिले कुल 9 गोल्ड मेडल में से 7 गोल्ड मलखंभ के थे। इसी कारण मप्र को नेशनल स्तर पर जारी हुई अंक तालिका में तीसरा मुकाम मिला।
मलखंभ खिलाड़ियों ने देश-विदेश में फहराया झंडा श्रीवास्तव ने बताया मप्र में मलखंभ की शुरुआत ही उज्जैन से हुई। क्योंकि श्री अच्युतानंद गुरु महाराष्ट्र से इस खेल की शुरुआत करने वाले दादा बालम भट्ट देवधरे के शिष्य थे। उन्होंने उज्जैन में आते ही मलखंभ का खंभा गाड़कर इस खेल की शुरुआत की। इसके बाद यहां के मलखंभ खिलाड़ियों ने देश-विदेश में हमारा झंडा फहराया।



